(फाइल फोटो: रंजीत सिंह कोहली उर्फ बब्बा उर्फ रकीबुल)
रांची. रंजीत सिंह कोहली उर्फ बब्बा उर्फ रकीबुल के पिता कोहली साहब (लोग उन्हें इसी नाम से जानते थे) जीवन के अंतिम दिनों में मानसिक रूप से बीमार थे। वैसे तो हमेशा वे अपने परिवार के साथ यूनिवर्सिटी कॉॅलोनी के ब्लॉक नं. चार स्थित अपने घर में ही बंद रहते थे। पर जब कभी भी सड़क पर निकलते, तो जोर-जोर से बोलते थे, प्रलय आ जाएगा.. प्रलय आ जाएगा। पर लोग उनकी बातों को गंभीरता से नहीं लेते। पर अब लोग उनकी बातों को आज याद कर रहे हैं।
कोहली साहब सेल्स टैक्स के रिटायर अफसर थे। ब्लॉक नं. चार के पास रहने वाले लोग बब्बा के बारे में भी बातें करते हैं। बताते हैं कि शुरू से ही वह तेज दिमाग का था। पिता की मौत के बाद जब घर में आर्थिक संकट आया, तो उसने कई जगहों पर काम किया। ढाबे के अलावा उसने वीडियो रिकॉर्डिंग का भी काम किया।
मनोज बाल मंदिर में जाता था पढ़ने
लोगों का कहना है कि बब्बा को कभी किसी ने स्कूल जाते नहीं देखा। पर, वह बरियातू हाउसिंग चौक पर चलने वाले मनोज बाल मंदिर में कभी-कभी जाता था। उसने वहीं से थोड़ी-बहुत पढ़ाई की। प्राप्त जानकारी के अनुसार उसने मैट्रिक किया हुआ है, हालांकि, कहां से किया, यह जानकारी नहीं है। कॉॅलोनी के लोग बताते हैं कि वह काफी जिद्दी स्वभाव का है।
आग लगने के बाद बिक गया फ्लैट
जब कोहली साहब पटना से रांची आए तो लोग उनके बारे में ज्यादा नहीं जानते थे। बताते थे कि उन्होंने कौशल को घर पर रख लिया, तो उनके सगे वालों ने उनसे किनारा कर लिया था। कोहली साहब की पत्नी का देहांत पूर्व में ही हो गया था, जबकि कौशल उनके घर में काम करने आती थी। इसी दौरान दोनों करीब आए और साथ रहने लगे, लेकिन एक दिन फ्लैट में आग लगी। उसके कुछ ही दिनों के बाद कोहली की मौत हो गई। इसके बाद फ्लैट भी बिक गया।
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