रांची. गुरु वह होता है जो मनुष्य को बेहतर इंसान बनाता है। गुरु सुविधा भोगी या वेतन भोगी नहीं होता। गुरु साक्षात परम ब्रह्म होता है। लेकिन महागुरु वो होता है जो अपने छात्र को ऊंचाई तक पहुंचने के लिए प्रेरित करता है। उक्त बातें नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ स्टडी एंड रिसर्च इन लॉ रांची के वाइस चांसलर प्रो. बीसी निर्मल ने कही।
वे गुरुवार को दैनिक भास्कर द्वारा आयोजित गुरु शिक्षा सम्मान समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। प्रो. निर्मल ने कहा कि प्राइमरी और हाई स्कूल के शिक्षकों पर छात्रों के चरित्र निर्माण की सबसे अहम जिम्मेदारी होती है। उच्च शिक्षा से जो शिक्षक जुड़े हुए हैं, वे छात्रों के इंटेलिजेंस को निखारने का काम करते हैं।
उन्होंने कहा कि शिक्षा ज्ञान आधारित समाज बनाती है। ऐसे में शिक्षकों का उत्तरदायित्व समाज के लिए बढ़ जाता है। होटल मैपल वुड में आयोजित समारोह में प्रो. निर्मल और विशिष्ट अतिथि एक्सआईएसएस के असिस्टेंट डायरेक्टर फादर डॉ. रंजीत पी. टोप्पो ने सभी शिक्षकों और शिक्षाविदों को मोमेंटो व शॉल देकर सम्मानित किया। मौके पर ईस्ट प्वाइंट स्कूल और महर्षि निखिलेश पब्लिक स्कूल के छात्र-छात्राओं ने आकर्षक रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश कर पूरे कार्यक्रम को मनमोहक बना दिया। मौके पर दैनिक भास्कर के बिजनेस हेड सौरेंद्र चटर्जी, यूनिट हेड जी. रवि सहित गणमान्य लोग उपस्थित थे।
शिक्षा से जीवन बेहतर बने : फादर रंजीत
मौके पर विशिष्ट अतिथि एक्सआईएसएस के असिस्टेंट डायरेक्टर फादर डॉ. रंजीत टोप्पो ने कहा कि भारत के इंटेलिजेंस का पूरा विश्व लोहा मानता है। इसके बाद भी देश में 30 करोड़ लोग अशिक्षित हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा सिर्फ साक्षरता मात्र के लिए नहीं होनी चाहिए। शिक्षा ऐसी मिलनी चाहिए, जिससे किसी व्यक्ति की जीवन शैली बेहतर हो सके। उन्होंने कहा कि इसके लिए नई सोच की जरूरत है। हर गुरु के मन में यह बात होनी चाहिए कि उनके शिष्य को उत्तम शिक्षा मिले। उन्होंने कहा कि सभी के सामूहिक प्रयास से ही यह संभव हो सकता है।
शिक्षकों ने कहा, ऐसे कार्यक्रम करते हैं प्रोत्साहित
सम्मान पाने के बाद शिक्षकों ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम हमें प्रोत्साहित करते हैं। वीमेंस कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. मंजु सिन्हा ने कहा कि शिक्षक हर क्षण कुछ न कुछ सिखाते ही हैं। शिक्षक यही चाहते हैं कि उनका शिक्षकत्व हमेशा बना रहे। ब्रिजफोर्ड स्कूल की प्रिंसिपल सीमा चितलांगिया ने कहा कि जब भी शिक्षक सम्मानित होते हैं, तो उनमें उत्साह और बढ़ जाता है। जब उनके पढ़ाए बच्चे उन्हें याद करते हैं, तो गर्व महसूस होता है। महर्षि निखिलेश चैरिटेबल ट्रस्ट के फाउंडर ने कहा कि जब स्कूल और शिक्षक गरीब बच्चों को पढ़ाते हैं, तो अच्छा लगता है। समाज के ऐसे बच्चों के लिए सभी शिक्षकों को आगे आना चाहिए।
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