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यहां दर्द से कराहते सीढ़ी चढ़ना व उतरना है मजबूरी, सिस्टम में कोई सुधार नहीं

7 वर्ष पहले
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(सदर अस्पताल में एक गर्भवती को हाथ पकड़कर ऊपर प्रसूति वार्ड में ले जाती एक महिला गार्ड।- फोटो)
रांची. राजधानी के सबसे बड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थान सदर अस्पताल के प्रबंधन ने सिस्टम न सुधारने की तो जैसे कसम खा ली है। यहां शुक्रवार को भी प्रसव के लिए दर्द से कराहती, चीखती महिलाओं के लिए सीढ़ियां चढ़ना-उतरना मजबूरी रही। न मदद के लिए कोई वार्ड ब्वॉय, न नर्स और न ही कोई स्ट्रेचर की व्यवस्था। एक ही मददगार, वहां खड़े चौकीदार। वह भी उनकी मर्जी पर निर्भर है कि मदद करें या न करें।
पूछने पर पता चला कि यहां ट्रॉली वाले स्ट्रेचर काफी समय से खराब हो गए हैं। लेकिन, इन्हें ठीक कराने या नया लाने का कभी प्रयास ही नहीं हुआ। स्ट्रेचर नहीं है, तो कर्मचारी भी निठल्ले बैठे रहते हैं। अब प्रसूताओं की मजबूरी है कि सीढ़ियां चढ़ें या लोग उन्हें उठाकर ऊपर लाएं। आए दिन स्ट्रेचर नहीं मिलने पर परिजन मरीजों को गोद में उठाए यहां दिखते हैं। यहां के सिविल सर्जन यह कहकर अपनी जवाबदेही से मुक्त हो जाते हैं कि यहां लिफ्ट नहीं है। बनाने की जगह भी नहीं है तो हम क्या कर सकते हैं।
ऐसे किया गया है यहां प्रसूताओं के साथ मजाक
सदर हॉस्पिटल का पूरा सिस्टम ही उल्टा है। निर्माण के दौरान ही अंधाधुंध काम हुआ। यहां प्रसूताओं से ऐसे मजाक किया गया है कि अस्पताल के ग्राउंड फ्लोर पर पुरुषों के लिए जेंट्स वार्ड है और प्रसव के लिए आने वाली महिलाओं के लिए प्रसूति विभाग ऊपर। हद ये कि ऊपर जाने के लिए न कोई स्लोप बनाया गया और नही लिफ्ट लगाई गई।
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