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'पति का श्राद्ध ठीक से हो', राज्यसभा की दौड़ से नाम हटने पर छलके आंसू

7 वर्ष पहले
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रांची/जमशेदपुर. मुझे कोई शिकवा-शिकायत नहीं है। माणिक महतो मेरे पिता और शिबू सोरेन अभिभावक हैं। गुरुजी ने कोई फैसला लिया है, तो उचित ही होगा। मैं तो अब सिर्फ यही चाहती हूं कि पति का श्राद्ध कर्म ठीक से हो। कुछ इस तरह सविता महतो ने अपना गम जाहिर किया।राजद की सरकार से समर्थन वापसी की धमकी के बाद मंगलवार को झामुमो और कांग्रेस बैकफुट पर आ गए। राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस ने आलमगीर आलम और झामुमो ने दिवंगत सुधीर महतो की पत्नी सविता महतो को नामांकन नहीं कराया। राजद के बाहरी प्रत्याशी प्रेमचंद गुप्ता को समर्थन की घोषणा कर दी। झामुमो ने सविता महतो को रांची बुलाकर खाली हाथ लौटा दिया। वे रोते हुए जमशेदपुर लौट गईं। स्थानीयता की दुहाई देने वाले नेताओं ने बाहरी के लिए सविता के आंसुओं की परवाह भी नहीं की।

इससे पहले मंगलवार सुबह राजद की कमान संभालते हुए अन्नपूर्णा देवी ने कांग्रेस और झामुमो को अपने पाले में करने के लिए सीएम हेमंत सोरेन और कांगे्रसी मंत्री राजेंद्र सिंह के साथ बैठकें कीं। उन्होंने फोन पर राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद की बात इन नेताओं से कराई। लालू से बातचीत के बाद हेमंत और राजेंद्र ने प्रेमचंद गुप्ता को समर्थन देने पर अपनी सहमति दे दी। गुरुजी ने भी उस पर अपनी मुहर लगा दी।

आगे की स्लाइड में पढ़िए राजनीति की शिकार सविता महतो..