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डाउनलोड करेंरांची। सरकारी और गैर सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में पढ़ रहे 49 लाख 61 हजार 108 बच्चों में से महज 8 लाख 70 हजार 36 बच्चों को ही ड्रेस मिल पाए हैं। महज 12 फीसदी बच्चों को ड्रेस मिला है, जबकि 88 फीसदी बच्चे अभी भी इससे वंचित हैं। राज्य के 11 जिलों की उपलब्धि काफी ही खराब है,
लिहाजा यहां के जिला शिक्षा अधीक्षकों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की तलवार लटक रही है। झारखंड शिक्षा परियोजना की राज्य परियोजना निदेशक ममता ने धनबाद, पलामू, साहेबगंज, गढ़वा, देवघर, गुमला, चतरा, पाकुड़, गिरिडीह, सरायकेला और हजारीबाग जिलों के डीएसई से शो कॉज पूछा है।
ममता ने इन सभी डीएस ईको निर्देश दिया है कि वे अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए बताएं कि इतना खराब परफॉरमेंस क्यों है। एसपीडी ने इसके लिए कठोरतम अनुशासनिक कार्रवाई की चेतावनी भी दी है। ममता ने कहा है कि सभी जिलों को एक अंतिम अवसर दिया गया है।
मार्गदर्शन न मांगे, काम करें
राज्य परियोजना निदेशक ममता ने जिला शिक्षा अधीक्षकों को दिए निर्देश में कहा है कि ड्रेस वितरण के संबंध में और मार्गदर्शन न मांगे, बल्कि तेजी से काम करें, जिससे छात्रों को पोशाक मिल सके। ममता ने कहा है कि जनवरी में ही इस बाबत निर्देश दिया जा चुका है कि सरकारी और गैर सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों के वर्ग एक से आठ तक के सभी नामांकित बच्चों को दो सेट नि:शुल्क पोशाक उपलब्ध कराना है।
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