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पति का चेहरा भी नहीं देख पाई शकुंतला,बेटे पंकज ने दी मुखाग्नि

9 वर्ष पहले
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रांची .आंखों से अविरल बहते आंसू। रूंधा गला। मन में एक ख्वाहिश कि पति का चेहरा देख तो लेते। लेकिन ऐसा हो नहीं पाया। शकुंतला देवी को अपने पति के अंतिम दर्शन का भी मौका नहीं मिल सका। कफन में लिपटे अपने पति ज्ञानचंद के शव को पकड़ वह बेसुध हो गईं। रोती-बिलखती बहू व बेटियों ने किसी तरह उन्हें सहारा दिया। पर वे बार-बार उसी ओर लपक पड़तीं। उन्हें अब समझाए कौन। नियति के आगे सब मजबूर। सात दिन पहले मार दिए गए जैन का वीभत्स हो चुके मृत शरीर का अंतिम दर्शन नहीं कर पाई।

अब अकेली कैसे करेगी पूजा
ज्ञानचंद और शकुंतला हर दिन साथ-साथ ही पूजा करते थे। उन्हें उम्मीद थी कि अपहरण करने वाले उन्हें छोड़ देंगे। इसके बाद वह पति के साथ पहले ही की तरह पूजा करेंगी। पर शायद नियति को यह मंजूर नहीं था। उनकी पथराई आंखें यही सवाल ज्ञानचंद के निर्जीव पड़े शरीर के पास खड़े हर एक से पूछ रही थी। पर इसका जवाब किसी के पास नहीं था।

बेटे पंकज ने दी मुखाग्नि, भर आई लोगों की आंखें
उद्योगपति ज्ञानचंद जैन की शवयात्रा गुरुवार को दिन के पौने तीन बजे निकाली गई। पार्थिव शरीर को एक वाहन से जैन मंदिर तक लाया गया। यहां से शवयात्रा में शामिल लोग पैदल ही हरमू मुक्तिधाम तक गए। रामगढ़ से भी कई व्यवसायी पहुंचे थे। शवयात्रा में विभिन्न सामाजिक व धार्मिक संस्थाओं के अलावा पूर्व डिप्टी सीएम हेमंत सोरेन, भाजपा विधायक सीपी सिंह, चैंबर अध्यक्ष रंजीत टिबड़ेवाल, महासचिव प्रदीप जैन, सुरेशचंद अग्रवाल, शरद पोद्दार, विष्णु बुधिया, ललित केडिया, संजय जैन सहित कई उद्यमी व व्यवसाई शामिल थे। हरमू मुक्तिधाम में बेटे पंकज जैन ने जैसे ही पिता को मुखाग्नि दी, वहां मौजूद लोगों की आंखें भर आईं। जैन की हत्या से हर कोई मर्माहत था।