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डाउनलोड करेंरांची. सरकार ने देवघर श्रावणी मेला में इस वर्ष से लागू टाइम स्लॉट सेवा तत्काल प्रभाव से खत्म कर दी है। कांवरिए अब पहले की तरह सीधे लाइन में लग सकेंगे। अर्घा सिस्टम लागू रहेगा।
देवघर के राजद विधायक सुरेश पासवान, गृह सचिव एनएन पांडेय और डीजीपी राजीव कुमार की रिपोर्ट के आधार पर मुख्यमंत्री ने यह निर्देश दिया। गुरुवार को कांवरियों के बीच मची भगदड़ और लाठीचार्ज की घटना के बाद इन तीनों लोगों को अर्घा व टाइम स्लॉट सिस्टम की समीक्षा के लिए देवघर भेजा गया था। सरकार के निर्णय से कांवरियों ने खुशी जताई है।
टीम ने नेहरू पार्क में जांचा टाइम स्लॉट : निरीक्षण के बाद गृह सचिव ने बताया कि टीम ने नेहरू पार्क में टाइम स्लॉट प्रणाली का निरीक्षण किया। कांवरियों के सुविधा पास की जांच भी की। अर्घा पद्धति और टाइम स्लॉट से कांवरियों को कितनी राहत मिल रही है, इसका कितना फायदा हुआ है। शेष पेज 12 पर
विधायकों की चिंता
झामुमो के लोबिन हेंब्रम ने कहा- लाठीचार्ज में 100 से अधिक श्रद्धालु घायल हुए हैं। यह गंभीर मसला है।
झामुमो के ही विद्युत वरण महतो ने बताया- गुरुवार को वह देवघर मंदिर परिसर में थे। वहां स्थिति विस्फोटक है। लोगों को छह से सात घंटे लाइन में लगे रहना पड़ता है।
मुख्यमंत्री का जवाब
मुख्यमंत्री ने कहा कि देवघर में भगदड़ के बाद हुए बल प्रयोग को उन्होंने गंभीरता से लिया है। इसी की समीक्षा के लिए उन्होंने टीम को देवघर भेजा था। उन्होंने तत्काल वहां बड़े-बड़े पंडाल लगाने और कांवरियों को सभी आवश्यक सुविधा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।
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क्या थी टाइम स्लॉट सेवा
कांवरियों को रास्ते में 10 रु. में सुविधा बैंड (रिस्ट बैंड) लेना पड़ता था। देवघर पहुंचने के बाद बैंड को एक्टिवेट कराने पर जलार्पण का समय मिलता था।
बिना ट्रायल लागू
इस का ट्रायल रामनवमी को होना था। लेकिन, तकनीकी खराबी के कारण नहीं हो सका। फिर 10 जुलाई को तय दूसरी तारीख पर भी ट्रायल नहीं हो सका। इसके बाद 21 जुलाई को इसे स्थायी रूप से चालू कर दिया।
यह था मकसद
मेले में कांवरियों को घंटों लंबी लाइन में लगना पड़ता था। उनकी कतार 15 किमी तक पहुंच जाती थी। इससे हमेशा अफरातफरी मचने की संभावना रहती थी। इससे बचने के लिए यह व्यवस्था लागू की गई थी।
अब इसलिए बदला नियम
रिस्ट बैंड को एक्टिवेट कराने के लिए लगा सॉफ्टवेयर अक्सर काम नहीं करता था। इससे कांवरियों को समय नहीं मिल पाता था। इससे जिन श्रद्धालुओं को समय मिला और जिन्हें नहीं मिला, दोनों नेहरू पार्क में लाइन में लग जाते थे। इस वजह से भीड़ बढऩे से अफरातफरी मच जाती थी।
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