रांची. झाविमो सुप्रीमो बाबूलाल मरांडी के नेतृत्व में पार्टी नेताओं का प्रतिनिधिमंडल गुरुवार को विधानसभा अध्यक्ष दिनेश उरांव से मिला। मरांडी ने भाजपा में शामिल झाविमो के छह विधायकों के मुद्दे पर अध्यक्ष से करीब आधा घंटे तक विभिन्न पहलुओं पर बात की। आग्रह किया कि जांच पूरी होने तक इन विधायकों को मंत्री नहीं बनाया जाए।
क्योंकि संविधान की 10वीं अनुसूची में यह स्पष्ट प्रावधान है कि केवल दो तिहाई विधायकों के चले जाने से ही विलय नहीं मनाया जा सकता। पार्टी कार्यसमिति के दो तिहाई सदस्यों के दूसरे दल में जाने पर ही उसे विलय माना जाएगा। यदि कोई निर्दलीय भी किसी दल में जाता है, तो उसकी सदस्यता रद्द मानी जाएगी। ऐसे में 10वीं अनुसूची का पूरा अध्ययन करने के बाद भाजपा में गए झाविमो के छह विधायकों पर कानून के तहत कार्रवाई सुनिश्चित होनी चाहिए।
मरांडी ने उरांव से पूरे मामले की जल्द से जल्द जांच करने की मांग की। ताकि ऐसी प्रवृत्ति पर रोक लग सके। इस पर विधानसभा अध्यक्ष ने उन्हें संविधान के तहत ही कार्रवाई का भरोसा दिलाया। प्रतिनिधिमंडल में प्रदीप यादव, संतोष कुमार, केके पोद्दार, आरएन सहाय, खालिद खलील, अजीज मुबारकी सहित सहित अन्य शामिल थे।