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डाउनलोड करेंरांची. संत जेवियर्स कॉलेज का फिफ्थ ग्रेजुएशन सेरेमनी सोमवार को हुआ। इसमें मुख्य अतिथि वाइस एडमिरल शेखर सिन्हा ने 29 टॉपरों में से उपस्थित 27 को गोल्ड मेडल और डिग्री प्रदान की। 29 टॉपरों में से 21 छात्राएं थीं। इसके अलावा स्नातक, पीजी और प्रोफेशनल कोर्सों के 2,217 स्टूडेंट्स को उपाधि प्रदान की गई। इस मेडल और प्रमाणपत्र मिलने के बाद छात्रों को अपने सपने पूरा करने के लिए डिग्री रूपी आधार मिल गया है।
प्राचार्य फादर डॉ. एन टेटे ने अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि 70 साल में कॉलेज के खाते में कई उपलब्धियां आई हैं। समय के साथ कोर्स में भी बदलाव हुए हैं। दर्जनभर प्रोफेशनल कोर्सों शुरू किए गए। कॉलेज को ऑटोनॉमस का दर्जा मिला। देश के विकास में भी इस कॉलेज के अहम योगदान है। अध्यक्षता फादर जेवियर सोरेंग, संचालन डॉ. केके बोस और धन्यवाद डॉ. एके सिन्हा ने किया।
कार्यक्रम में पूर्व प्रोवीसी डॉ. वीपी शरण, डीन साइंस डॉ. रमेश पांडेय, फा. एन. लकड़ा, डीन डॉ. आरएन सिन्हा समेत शिक्षक, कर्मचारी और स्टूडेंट्स मौजूद थे। मौके पर शिक्षाविद स्व. फादर डिब्रावर को श्रद्धांजलि दी गई। डॉ. कमल कुमार बोस ने फादर डिब्रावर का संक्षिप्त परिचय दिया।
राष्ट्र निर्माण में रोल मॉडल बनें छात्र : शेखर सिन्हा
संत जेवियर कॉलेज के पूर्व स्टूडेंट सह वाइस एडमिरल शेखर सिन्हा ने कहा कि सफलता झटके में नहीं मिलती। इसे पाने के लिए ईमानदार प्रयास जरूरी है। हमारे देश में इसके कई उदाहरण हैं, जैसे पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम, जमशेदजी टाटा, धीरू भाई अंबानी, नारायण मूर्ति आदि, जिन्होंने विश्व में भारत की पहचान दिलाई। उन्होंने छात्रों से रोल मॉडल बन कर राष्ट्र सेवा की भावना जगाने की सीख दी। उन्होंने संत जेवियर कॉलेज की प्रशंसा करते हुए कहा कि शिक्षा के साथ राष्ट्र निर्माण में इस कॉलेज की अहम भूमिका है। उन्होंने छात्रों से अपने परिवार के प्रति ईमानदार रहते हुए अपनी संस्कृति पर गर्व करने की सलाह दी।
बाधाएं पार कर बनें मिसाल : फादर जेवियर
फादर जेवियर सोरेंग ने छात्रों से कहा कि आपने अहम बाधा पार कर ली है। लेकिन अभी भी कई बाधाएं हैं, जिन्हें पार कर आप मिसाल बन सकते हैं। यहां के स्टूडेंट्स लक्ष्य पाने में सक्षम हैं। छात्र-छात्राएं भुखमरी, भ्रष्टाचार और शोषण के खिलाफ आवाज उठाएं। उन्होंने संत जेवियर कॉलेज के एल्युमिनी को मजबूत करने की भी बात कही। उन्होंने स्टूडेंट्स से कहा कि 1944 से यह संस्थान आपको बहुत कुछ दे रहा है, अब संस्थान और भावी पीढ़ी के लिए कुछ करने की बारी आपकी है।
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