रांची. मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कि अधिकारियों को अपनी कार्यसंस्कृति में सुधार लाने की जरूरत है। उन्हें जनता की भावनाओं को समझते हुए उनकी समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर करना चाहिए।
कार्यकर्ता दरबार में कई तरह की समस्याएं आ रही हैं। उससे तो यही लगता है कि निचले स्तर पर जन समस्याओं का समय पर निदान नहीं हो रहा। सीएम शनिवार को भाजपा मुख्यालय में आयोजित कार्यकर्ता दरबार के बाद पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। कार्यकर्ता दरबार में आम लोग भी पहुंचे थे। दास ने करीब 100 लोगों से सीधे तौर पर उनकी समस्याएं सुनी। जबकि लगभग 200 लोगों से आवेदन लिए गए।
बाटुल ने लगाया आरोप
पूर्व मंत्री सत्यानंद झा बाटुल ने कहा कि जामताड़ा में अवैध उत्खनन, पशु तस्करी, कोयले की चोरी सहित अन्य गड़बड़ियां की जा रही हैं।
सीएम ने दी एक हजार रुपए की मदद
दुमका से अपने 10 साल के बेटे मधुसूदन को लेकर आए भागीरथ मांझी ने सीएम से इलाज में मदद का आग्रह किया। मधुसूदन की किडनी में गड़बड़ी है। कहा कि इलाज के लिए उनके पास पैसे नहीं हैं। सीएम ने दवा के लिए उसे तुरंत 1000 रुपए दिए। कार्यकर्ता दरबार में सबसे अधिक जमीन विवाद की समस्याएं आईं। इसके अलावा दहेज प्रताड़ना आदि सामाजिक मुद्दे आए।
भाई के हत्यारे को बचा रही पुलिस
घाटशिला की पूनम साहू अपनी मां के साथ आई थीं। आरोप लगाया कि उनके भाई की ओम प्रकाश चावला ने हत्या करा दी। बिजली का करंट लगाकर उसे मार डाला। अब पुलिस उसे बचा रही है। सीएम ने घाटशिला के पुलिस अफसर से बात की। साथ ही पूनम को आईजी एमएस भाटिया से मिलकर अपनी शिकायत दर्ज कराने की बात कही।
रंगदारी से त्रस्त परिवार
झुमरी तिलैया से पूरे परिवार के साथ आए अवधेश कुमार गोस्वामी ने कहा कि उन्होंने डीवीसी कॉलोनी, विशुनपुर में 2009 में जमीन ली थी। बाउंड्रीवाल बनाकर छोटा सा घर भी बनाया था। लेकिन पड़ोस के ही बासुदेव यादव व महेंद्र यादव उनसे दो लाख रुपए की मांग कर रहे हैं। धमकी भी देते हैं। सीएम ने कोडरमा के एसपी से बात करने के बाद उन्हें न्याय दिलाने का आश्वासन दिया।
संजीवनी मामले की जांच तेजी से नहीं हो रही
संजीवनी बिल्डकॉन पीड़ित संघ के सदस्यों ने आरोप लगाया कि सीबीआई इस मामले की जांच तेजी से नहीं कर रही है। इसमें 600 लोगों का पैसा फंसा है। दलाल अब भी जमीन बेच रहा है।
भुगतान का निर्देश
बकाए की शिकायत मिलने के बाद सीएम ने जेएसएफसी के एमडी बालेश्वर सिंह से बात की। उन्हें वित्तीय वर्ष 2011-12 और 2012-13 से एनसीसीएफ की बकाया राशि का जेएसएफसी को अविलंब भुगतान करने का निर्देश दिया।