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हड़ताल: रिम्स व सदर के जेनरिक स्टोर में भी नहीं मिलीं दवाएं

8 वर्ष पहले
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रांची. दवा दुकानदारों की देशव्यापी हड़ताल का राजधानी में जबर्दस्त असर रहा। सभी दुकानें पूरे दिन बंद रहीं। जीवन रक्षक दवाओं व ऑपरेशन में इस्तेमाल होने वाले सामान के लिए परिजन पर्ची लेकर यहां-वहां भटकते रहे, पर दवाएं नहीं मिलीं।
सबसे ज्यादा परेशानी रिम्स में इलाजरत मरीजों के परिजनों को हुई। सदर अस्पताल और डोरंडा स्थित राजकीय औषधालय के रोगियों को भी दवा के लिए भटकते देखा गया। रिम्स और सदर अस्पताल की जेनरिक दवा दुकानों ने भी धोखा दिया। इनके काउंटरों से कई जरूरी दवाएं नहीं मिलीं। हालांकि निजी अस्पतालों ने मरीजों के लिए इंतजाम कर रखा था। अस्पतालों के काउंटर से दवाएं बेची जा रही थीं। इधर, झारखंड केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन ने हड़ताल को पूर्ण सफल बताया है।
हड़ताल के कारण रिम्स स्थित दो दर्जन से अधिक दवा दुकानें बंद थीं। मेन रोड, बरियातू, धुर्वा, हटिया, डोरंडा, हिनू, हरमू, अपर बाजार, कांटाटोली, बिरसा चौक, कांके, नामकुम समेत शहर के हर कोने में स्थित दवा दुकानें बंद मिलीं।
जेनरिक स्टोर से भी लौटे मरीज
रिम्स और सदर अस्पताल की जेनरिक दवा दुकानों पर अपेक्षाकृत कम भीड़ दिखी। काउंटर पर बैठे फार्मासिस्टों के मुताबिक रोजाना की तरह ही मरीज दवा के लिए आए थे। लेकिन उनकी पर्ची में लिखी कई दवाएं हमारे यहां नहीं थीं, इसलिए लौटाना पड़ा।
विरोध जारी रहेगा : अमर सिन्हा
झारखंड केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स एसोसिएशन के बैनर तले शुक्रवार को दवा दुकानदारों ने जिला मुख्यालयों पर धरना दिया। रांची में थड़पखना स्थित केमिस्ट्स भवन से जुलूस निकला और अलबर्ट एक्का चौक पर प्रदर्शन किया गया। इस दौरान एसो. के अध्यक्ष श्रीकृष्णा प्रधान, महासचिव अमर सिन्हा, श्रीकृष्ण ढांढ़निया ने कहा कि दवा विक्रेता दवा कानून संशोधन 2008 का पुरजोर विरोध करते रहेंगे। सरकार दवा विक्रेताओं का कमीशन घटा रही है, इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
नहीं मिली कोई शिकायत
हड़ताल की सूचना मिलने के बाद मैंने मेडिकल अफसर (स्टोर) को सभी इमर्जेंसी दवाओं की व्यवस्था करने का निर्देश दिया था। इमर्जेंसी में सभी प्रकार के इंजेक्शन थे। ऑपरेशन भी हुए हैं। कहीं कोई शिकायत नहीं मिली है।॥
डॉ. एसके चौधरी, अधीक्षक रिम्स