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ट्यूशन फी के पैसे से लैपटॉप व बाइक खरीद रहे छात्र

7 वर्ष पहले
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रांची. बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए सरकार कमजोर और गरीब बच्चों को ट्यूशन फीस देती है। लेकिन, खबर है कि बच्चे स्कूल में फीस जमा न कर, इन पैसों का इस्तेमाल बाइक, लैपटॉप, मोबाइल इत्यादि खरीदने में कर रहे हैं। इसका खुलासा जिला कल्याण पदाधिकारी नीरज कुमारी और शैक्षणिक संस्थानों के साथ हुई बैठक में हुआ।
बैठक में जिले के कई संस्थानों ने जिला प्रशासन के माध्यम से इस पर रोक लगाने के लिए सरकार पर दबाव बनाया। कहा कि अगर ऐसा ही होता रहा तो इन बच्चों को उच्च शिक्षा देने में मुश्किलें आएंगी। सुझाव दिया गया कि कॉलेज के छात्रों के खाते में पैसा भेजने के बाद इसकी सूचना कॉलेज प्रबंधन को भी दी जानी चाहिए, ताकि सूचना मिलने के बाद वे छात्रों पर दवाब बना कर ट्यूशन फीस जमा करवा सकें। कल्याण पदाधिकारी ने कहा वे इस मुद्दे को सरकार तक पहुंचाएंगी।
करीब 24 लाख बकाया है ट्यूशन फीस
आरटीसी (आईटी) के अमित कुमार ने बताया कि सिर्फ सत्र 2013-14 में ट्यूशन फीस के रूप में करीब 24 लाख रुपए बकाया है। जबकि हमारे यहां के 720 छात्रों को सरकार स्टाइपेंड दे रही है। सीआईटी, टाटीसिलवे के यूनुस के मुताबिक कई ऐसे बच्चे भी हैं, जो स्टाइपेंड के अलावा अपने घर से भी ट्यूशन फीस ले रहे हैं। क्योंकि इनके द्वारा स्टाइपेंड का फॉर्म भरे जाने की सूचना घरवालों को नहीं होती है।
2013 से स्टूडेंट्स के एकाउंट में भेजी जा रही है राशि
कल्याण विभाग के तत्कालीन सचिव राजीव अरुण एक्का ने 19 सितंबर 2013 को मुख्य सचिव के निर्देशानुसार ई-कल्याण के तहत शैक्षणिक संस्थानों को दी जा रही राशि छात्र-छात्राओं के एकाउंट में ही देने का आदेश जारी किया था। यह हस्तांतरण डीबीटी के माध्यम से करने को कहा गया था। इसके बाद से ही छात्रों के एकाउंट में स्टाइपेंड की राशि भेजी रही है।
65 हजार तक मिलता है स्टाइपेंड
सरकार के स्टाइपेंड में ट्यूशन और मेंटेनेंस दोनों फीस का समायोजन होता है। इसमें मेंटेनेंस का पैसा स्टूडेंट के खर्च के लिए और ट्यूशन का पैसा संस्थानों को देने के लिए होता है। तकनीकी शिक्षा के लिए सरकार प्रत्येक छात्र को 60 से 65 हजार रुपए तक दे रही है। लेकिन, इनके एकाउंट में पैसा जाने से वे इसका बेजा इस्तेमाल कर रहे हैं।