रांची. नगर निगम बोर्ड की बैठक में मंगलवार को जमकर हंगामा हुआ। पहले पेंशन के मुद्दे पर कर्मचारियों ने बवाल किया। फिर गुस्साए कर्मचारियों ने जनप्रतिनिधियों का बहिष्कार और कामकाज ठप करने की चेतावनी डे डाली। इस पर पार्षद उग्र हो गए। कुल मिलाकर शहर की व्यवस्था के लिए हुई बैठक में अव्यवस्था के सिवा कुछ नहीं दिखा।
निगम बोर्ड की बैठक में निगम कर्मचारियों को एक अप्रैल 2010 से पेंशन देने के मामले पर चर्चा हुई। पर, बात नहीं बनी और मामला टाल दिया गया। पार्षदों ने कहा कि निगम पहले पेंशन मद के खर्च का आकलन करे। और, जब पूरा हिसाब आ जाए, तब बात हो। इसकी सूचना जैसे ही निगम कर्मचारी संघ को मिली, कर्मचारी उग्र हो उठे। इसके बाद निगम में एक घंटे तक हंगामा होता रहा। कर्मचारी बोर्ड के निर्णय के खिलाफ नारेबाजी करने लगे।
बाद में निगम सीईओ मनोज कुमार ने हस्तक्षेप कर उन्हें शांत कराया। तभी कर्मचारियों का हंगामा देख पार्षद भी गर्म हो गए। और, कर्मचारी संघ के अध्यक्ष नरेश राम को हटाने की मांग करने लगे। इस पर सीईओ ने कहा कि यह उनके विशेषाधिकार का मामला है। इस पर बाद में फैसला लेंगे।
बैठक के दौरान ही पार्षद नाजिमा रजा ने डिप्टी मेयर संजीव विजयवर्गीय को डायस से हटाने की मांग उठाई। कहा कि मेयर के रहते डिप्टी मेयर का कोई काम नहीं है। डिप्टी मेयर को डायस पर बैठे रहने का कोई अधिकार नहीं है। बात बढ़ने पर नाजिमा हंगामा करने लगीं। लेकिन कुछ महिला पार्षदों ने उन्हें शांत कराया।
जनगणना को ही मानने से इनकार
सरकार से मिले फंड को लेकर बैठक में कई बार मेयर, डिप्टी मेयर से सीईओ की गरमा-गरम बहस हुई। लेकिन दोनों पक्षों ने एक-दूसरे को शांत करा दिया। फंड बंटवारे का आधार वार्ड की जनगणना को बनाया गया है। इससे नाराज पार्षदों ने जनगणना को भी मानने से इंकार कर दिया। पार्षद ओमप्रकाश ने कहा कि उनके वार्ड में जनगणना में बताई गई आबादी से अधिक मतदाता हैं। इसलिए पहले जनगणना में सुधार होना चाहिए। अन्य पार्षदों ने भी जनगणना पर सवाल खड़े किए।
टैक्स की हो रही मनमानी वसूली
स्पैरो सॉफ्ट कंपनी लोगों से मनमाना होल्डिंग टैक्स वसूल रही है। पुराना टैक्स जमा करने वालों से भी कंपनी टैक्स की मांग कर रही है। इसे लेकर दर्जनों लोगों ने निगम में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायतें यहां तक हैं कि कंपनी के लोग बदतमीजी तक करते हैं। पिछले साल की रसीद भी नहीं मानते। निगम बोर्ड की बैठक में भी इस मामले को पार्षदों ने प्रमुखता से उठाया। इसके बाद कंपनी को शोकॉज करने का निर्णय लिया गया।
शहर की सफाई फिर एनजीओ को देने की तैयारी
सफाई व्यवस्था से असंतुष्ट पार्षदों के एक गुट ने सफाई की कमान एनजीओ को देने की वकालत की है। वहीं, दूसरा गुट निगम के जिम्मे ही सफाई व्यवस्था को रखने पर अड़ा हुआ है। अब सभी पार्षद लिखित रूप में मेयर को बताएंगे कि उनके वार्ड में निगम से सफाई कराएं या एनजीओ से। यह निर्णय बोर्ड की बैठक में लिया गया। मो. असलम सहित कई पार्षदों ने कहा कि निगम सफाई पर प्रतिमाह 1.50 करोड़ रुपए खर्च कर रहा है। फिर भी शहर की स्थिति ठीक नहीं है। ऐसे में एनजीओ को काम दिया जाए। डिप्टी मेयर ने भी इस पर हामी भरी। इस पर निगम सीईओ ने कहा कि निगम अपने स्तर से बेहतर सफाई करा रहा है। वैसे, अगले तीन-चार माह में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के तहत सफाई का काम निजी एजेंसी को दे दिया जाएगा।
टैक्स की हो रही मनमानी वसूली
स्पैरो सॉफ्ट कंपनी लोगों से मनमाना होल्डिंग टैक्स वसूल रही है। पुराना टैक्स जमा करने वालों से भी कंपनी टैक्स की मांग कर रही है। इसे लेकर दर्जनों लोगों ने निगम में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायतें यहां तक हैं कि कंपनी के लोग बदतमीजी तक करते हैं। पिछले साल की रसीद भी नहीं मानते। निगम बोर्ड की बैठक में भी इस मामले को पार्षदों ने प्रमुखता से उठाया। इसके बाद कंपनी को शोकॉज करने का निर्णय लिया गया।
पहले क्या हुआ
जनवरी 2014 में एनजीओ को सफाई का काम देने की पूरी तैयारी हो गई थी। लेकिन निगम के जनप्रतिनिधियों और पदाधिकारियों ने अपने-अपने लोगों का एनजीओ बनवा कर टेंडर भरवा दिया था। इस बात का खुलासा होने के बाद आनन-फानन में फैसला बदला गया।
अब क्या आशंका
जनवरी में एनजीओ को एक वर्ष के लिए सफाई का काम देने का निर्णय हुआ था, तो एनजीओ संचालकों ने नगर विकास मंत्री से मिलकर कहा था कि समय बढ़ाकर दो वर्ष किया जाए। क्योंकि, एनजीओ को संसाधन की व्यवस्था अपने स्तर से करनी पड़ेगी। अब अधिकतम छह माह के लिए एनजीओ को काम देने की तैयारी हो रही है। ऐसे में उसी एनजीओ काम मिलेगा जो जनप्रतिनिधियों और अफसरों को खुश कर सके।
क्या हुआ असर
चालू वर्ष के छह माह गुजर गए। अगले तीन माह विधानसभा चुनाव में गुजर जाएंगे। लेकिन, अब तक कोई खास काम नहीं हुआ। निगम को मिली 13 करोड़ से अधिक राशि जस की तस पड़ी है। दरअसल, नगर विकास विभाग ने फंड का बंटवारा वार्ड की जनसंख्या और क्षेत्रफल के आधार पर करने का निर्देश दिया है। इस पर पार्षद राजी नहीं हैं। ऐसे में शहर का विकास लटका हुआ है।
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