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डाउनलोड करेंरांची। गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की 152वीं जयंती पर राजधानी के कई जगहों पर समारोह का आयोजन किया गया। यूनियन क्लब व लाइब्रेरी के तत्वावधान में प्लाजा हॉल में चित्रांगदा नृत्य नाटिका का मंचन किया गया। मजलिस द्वारा जवाहर लाल नेहरू कला केंद्र में कवि प्रणाम का आयोजन किया गया। सीएमपीडीआई के सीएमडी आवास पर प्रभाती अनुष्ठान हुआ। विकास भारती परिसर में गुरुदेव को श्रद्धांजलि दी गई।
विकास भारती के सचिव अशोक भगत ने गुरुदेव की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। उन्होंने बताया कि शांतिनिकेतन स्थित विश्व भारती विवि के तर्ज पर गुमला के बिशुनपुर में विकास भारती द्वारा आश्रम का संचालन किया जा रहा है। उसके बाद सभी सदस्यों ने गुरुदेव को श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम का संचालन सुजीत गोस्वामी ने किया। मजलिस के कवि प्रणाम की शुरुआत प्रथमो आदि तबो शोक्ति... रवींद्र संगीत से हुई। गार्गी घोषाल ने पुजारिनी कविता की आवृत्ति की। इसमें बौद्ध की स्थापना को लेकर जो बिडंबनाएं थी, उसका वर्णन है।
भगवान बुद्ध की पूजा को लेकर राजा की निषेधाज्ञा का अवहेलना करने वाली सामान्य पुजारिनी को अपनी प्राणों की आहुति देनी होती है। इसी घटना को यहां बड़े ही मार्मिक दृश्य के माध्यम से दिखाया गया। इसके पहले विनीता सरकार ने बांशी कविता सुनाई। कुंतल पटवारी और श्रावणी राय ने कर्ण कुंती संवाद सुनाया। पांडवों की माता कुंती जब कुरुक्षेत्र में अपने पुत्र कर्ण से मिलती हैं, तो दोनों में जो वार्तालाप होता है, उसे गुरुदेव ने बड़े ही खूबसूरती से उकेरा था।
उसी का वर्णन इस कविता में था। अंत में लिली मुखर्जी के निर्देशन में मायार खेला नृत्य नाटिका का मंचन हुआ। इसमें गुरुदेव ने त्रिकोण प्रेम को दर्शाया। संगीत कलाकार लिली मुखर्जी, तनिमा चटर्जी, राम मोहन चटर्जी, बिशाखा चटर्जी, वर्णाली चटर्जी, अर्नव बोस, शंपा भट्टाचार्या, पार्वती गोस्वामी और मानस बनर्जी ने गीतों को अपनी आवाज से सजाया। कौशिक राय ने नृत्य निर्देशन किया।
तापसी चक्रवर्ती और इंद्रानी बनर्जी के निर्देशन में श्रेया दासगुप्ता, मेघना, प्रिता, अमृता, शुभांगी, रंजिनी, पूर्वा, बासुदेव, अनुषा, आशृता, प्रतीक्षा, अन्वेष, सौजन्या, अवंतिका, अश्लेषा, तानिया, रूबेना, मोनालिसा, मनिकुंतला, तनिमा, सुतापा, नीना, भाश्वती, शर्मिष्ठा, शीला, विदिशा, हिया, सौमेन, सौमित्र, पल्लव, वैदूर्य, देव कुंतला, राजीव सहित अन्य ने खूबसूरत प्रस्तुति दी। पाठ किया कंचन दत्ता और तापसी चक्रवर्ती ने।
एसपीटीएन द्वारा टैगोर हिल परिसर में मनाए जा रहे टैगोर जन्मोत्सव सप्ताह के तहत गुरुवार को पेंटिंग प्रदर्शनी लगाई गई। शाम को झारखंड के चित्रकारों की स्थिति पर आयोजित परिचर्चा में विनोद रंजन ने कहा कि यहां प्रदर्शनी के लिए कला दीर्घा नहीं है। दिनेश सिंह ने कला महाविद्यालय की स्थापना पर जोर डाला। जन्मोत्सव समारोह का समापन शुक्रवार को होगा।
प्लाजा हॉल में मंचित चित्रांगदा नृत्य नाटिका ने लोगों का खूब मनोरंजन किया। खचाखच भरे हॉल में राजधानी के कोने कोने से आए कलाप्रेमियों ने मंत्रमुग्ध होकर कार्यक्रम का आनंद उठाया। मानव प्रेम इस नाटिका का विषय था। कवि ने तृतीय पांडव अर्जुन के प्रेम को इस नृत्य नाटिका में उकेरा था,
जिसे गुरुवार को कलाकारों ने मंच पर बखूबी प्रदर्शित किया। कहानी एक राजकुमारी के इर्द गिर्द था। मणिपुर के राजा को शिव के वर से संतान प्राप्त हुई। वह एक कन्या थी। लेकिन राजा ने उसे पुत्र जैसा शिक्षा दी। युद्ध विद्या में पारदर्शी चित्रांगदा जब अर्जुन के प्रेम को स्वीकार की, तो वह सुंदर और कोमल बन गई।
इस घटना को गुरुदेव ने गीत, नृत्य और कथा में पिरोया था। आज के कार्यक्रम का निर्देशन किया प्रणति लाहिड़ी ने । इसमें श्रमोणा भट्टाचार्या, श्रेयशी चटर्जी, मोहर चक्रवर्ती, चंद्रायण मित्रा, कौशिकी मुखर्जी, सृजा मुखोपाध्याय, शायोनिका साहा, मुस्कान प्रिया, ओलिवा दोनाचल, देवोस्मिता सान्याल,
स्तुति अग्रवाल, दिव्यांशु सान्याल, सुतनु मित्रा, सुरभि बनर्जी, शर्मिला डे, सिमांतिका सोनल, महानंदा चक्रवर्ती, नवोदिता सान्याल, सुकन्या चक्रवर्ती ने डांस किया। शुक्ला दासगुप्ता, पारोमिता चौधरी, शुभाशीष मित्रा, प्रबीर कुमार लाहिड़ी, सुदिप्ता चक्रवर्ती, बेदोत्रोयी सरकार और मौसमी मल्लिक ने नृत्य व गीतों से नाटिका को सजाया।रांची वीमेंस कॉलेज के बांग्ला विभाग में गुरुदेव को श्रद्धांजलि दी गई। डॉ रत्ना राय और शुभ्रा चटर्जी ने गुरुदेव की रचनाओं पर प्रकाश डाला। स्टूडेंट्स ने रवींद्र संगीत गाया।
पीजी बांग्ला विभाग में गुरुदेव की जयंती मनी
रांची । रांची यूनिवर्सिटी के पीजी बांग्ला डिपार्टमेंट में गुरुदेव रवींद्र नाथ टैगोर की जयंती पर गुरुवार को सेमिनार का आयोजन किया गया। इसमें विभाग के छात्रों ने गुरुदेव लिखित रोग चिकित्सा नाटक का मंचन किया। शिल्पा ने गुरुदेव के संगीत पर नृत्य प्रस्तुत कर सभी का मन मोह लिया। प्रोवीसी डॉ. एम रजीउद्दीन ने कहा कि गुरुदेव के विचार आज भी प्रासंगिक हैं।
प्रॉक्टर डॉ. एक्यू जिलानी ने कहा कि टैगोर की सभी कृतियां अनमोल हैं। एचओडी डॉ. एनके बेरा ने कहा कि गुरुदेव में चिंतन, मनन और सृजन तीनों विशेषताएं एक साथ थीं। कार्यक्रम में डॉ. नीलिमा पाठक, डॉ. सरस्वती मिश्र, डॉ. एसएमपीएन शाही, डॉ. इंदिरा बनर्जी, डॉ. रत्ना राय, डॉ. बी चटर्जी ने भी अपने विचार रखे।
सीएमपीडीआई में मनी गुरुदेव की जयंती
व्यक्तो होक जीबनरो जय...हे नूतन... रवींद्र संगीत की धुन पर गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर के इस गीत के साथ सीएमपीडीआई में गुरुवार को भोर हुई। गुरुदेव की जयंती के अवसर पर सीएमडी आवास में समारोह का आयोजन किया गया था। कार्यक्रम की शुरुआत गुरुदेव के चित्र पर माल्यार्पण से हुई। प्रबीर सान्याल ने दिस माई वीयरीनेस फॉरगिव मी लॉड... क्लांति आमार खमा करो प्रभु ... सुनाया। पार्थो सारथी राय, सुभाष विश्वास,
अभीक विश्वास, आर्किटेक्ट सुदिप्तो चौधरी, भारती विश्वास आदि ने अपनी प्रस्तुतियां देकर टैगोर को याद किया। आलो आमार आलो ओगो... आकाश भरा सूर्यो तारा... से कार्यक्रम का समापन हुआ। सीएमडी एके देबनाथ, निलांजना, नीला साहा, रीमा कोनार, नंदिनी दास सहित अन्य ने कोरस गाया।
गुरुदेव की जयंती पर सांस्कृतिक कार्यक्रम
रांची त्न वीमेंस कॉलेज के बांग्ला विभाग में गुरुदेव की जयंती पर सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर डॉ. रत्ना राय, डॉ. शुभा चटर्जी और डॉ. जयश्री ने गुरुदेव रवींद्र नाथ टैगोर के जीवन और साहित्य पर प्रकाश डाला। गुरुदेव की संगीत पर प्रीतिबाला लक्ष्मी ने नृत्य प्रस्तुत किया। इस अवसर पर विभाग के शिक्षक और स्टूडेंट्स उपस्थित थे।
एलईबीबी स्कूल में मना टैगोर जन्मोत्सव
ओसी कंपाउंड स्थित एलईबीबी हाई स्कूल में गुरुवार को रविंद्रनाथ टैगोर का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। मौके पर बच्चों ने विभिन्न प्रकार के गीतों पर नृत्य प्रस्तुत किए। रविन्द्र संगीत और चित्रांकन प्रतियोगिता भी आयोजित की गई। कार्यक्रम का संचालन डॉ राम रंजन सेन ने किया।
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