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तलाक के बिना भी अलग रह सकती है तारा, कानून नहीं हुई शादी

7 वर्ष पहले
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रांची. तारा शाहदेव बनाम रंजीत सिंह कोहली उर्फ रकीबुल प्रकरण की जांच पुलिस ने शुरू तो बहुत तेजी के साथ की थी, पर उसी रफ्तार से इसकी गति भी धीमी पड़ गई है। रविवार को इसपर तारा शाहदेव ने कई सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा है कि तीन जजों से पूछताछ के बाद उस रिटायर जज से अबतक पूछताछ क्यों नहीं की गई जिनके नाम की चर्चा तीनों जज ने की है। वहीं उन्होंने कहा है कि मुश्ताक अहमद से भी पूछताछ नहीं की गई। पटना हाईकोर्ट से अनुमति मिलने के आठ दिन बाद भी शेरघाटी के जज से पूछताछ नहीं की गई। रंजीत उर्फ रकीबुल के फ्लैट से जब्त सिमकार्ड का खुलासा पुलिस क्यों नहीं कर रही है। तारा ने जांच में पारदर्शिता नहीं बरतने का भी आरोप लगाया है। तारा का कहना है कि पुलिस शुरू से ही दबाव में काम कर रही है। इस कारण से पुलिस ने अब जांच धीमी कर दी है, ताकि जल्द सीबीआई केस को टेकअप कर ले।
पूछताछ में क्या कहा था जज ने
हजारीबाग के जिला जज नागेश्वर प्रसाद, देवघर की एडीजे वीणा मिश्र और देवघर के जिला जज पंकज श्रीवास्तव ने पुलिस के समक्ष यह स्वीकार किया था कि रंजीत उर्फ रकीबुल से उनका परिचय चतरा के तत्कालीन जज और रिटायर जज आईडी मिश्रा ने कराया था। इस आधार पर पुलिस ने रिटायर जज आईडी मिश्रा से पूछताछ करने का निर्णय लिया था। हालांकि अबतक उन्हें पूछताछ के लिए नोटिस नहीं भेजा गया है।
रंजीत उर्फ रकीबुल ने खुद बताए जजों के नाम
रंजीत उर्फ रकीबुल ने भी अपने स्वीकारोक्ति में कई जज से संपर्क की बात कही थी। उसने कहा है कि हाईकोर्ट के सस्पेंड विजिलेंस रजिस्ट्रार मुश्ताक अहमद से मधुर संबंध रहने के कारण वो न्यायालय से संबंधित काम में आसानी से पैरवी कर लेता था। हजारीबाग के जिला जज नागेश्वर प्रसाद,, देवघर एडीजे वीणा मिश्रा, पूर्व एडीजे रिटायर आईडी मिश्रा उसके शुभचिंतक व सहयोगी रहे हैं। पूर्व न्यायिक दंडाधिकारी रांची बिनोद चंद्र पांडेय, पूर्व जिला जज प्रवीर, पूर्व गुमला जिला जज प्रसन्न कुमार दूबे, झालसा के पूर्व सचिव बीके गोस्वामी ( अब जिला जज) व बार काउंसिल के पूर्व चेयरमैन पीसी त्रिपाठी से उसकी अच्छी जान-पहचान है।
तलाक के बिना भी अलग रह सकती है तारा
झूठ बोलकर तथाकथित विवाह करने के तारा शाहदेव प्रकरण में अब एक नया मोड़ आया है। रकीबुल हसन उर्फ रंजीत सिंह कोहली और तारा शाहदेव का विवाह कानून की नजर में वैध नहीं है। इस संबंध में पूछे जाने पर अधिवक्ता अभय मिश्रा ने कहा कि इन दोनों की शादी या तो हिंदू मैरेज एक्ट या फिर मुस्लिम मैरेज एक्ट के तहत ही हो सकती है, जबकि तारा शाहदेव ने मजिस्ट्रेट के समक्ष जो बातें बताई हैं उसके अनुसार इन दाेनों कानूनों का अनुपालन इनकी शादी में नहीं हुआ है। इसलिए जब विवाह ही मान्य नहीं हो तो तारा तलाक के बिना भी अलग रह सकती है। तारा के बयान के अनुसार यह शादी रकीबुल ने झूठ बोलकर छल से की और अग्नि के समक्ष सात फेरे भी नहीं लिए। इसलिए ये दोनों आधार ही शादी को अमान्य करने के लिए पर्याप्त हैं।
निष्पक्ष जांच के लिए एसएसपी को आवेदन
तारा मामले पर हाईकोर्ट में याचिका दायर करने वाले राजेश सिंह ने रांची के एसएसपी को पत्र लिखकर बताया है कि रकीबुल ने छल से झूठ बोलकर पीड़िता के साथ विवाह किया इसलिए उसके विरुद्ध धारा 419, 420 तथा 496 के आधार पर कार्रवाई होनी चाहिए। प्रताड़ना के लिए रकीबुल के विरुद्ध क्रिमिनल लॉ अमेंडमेंट एक्ट 2013 के तहत आए नए कानून की धारा 323 व 326 ए के तहत मामला दर्ज कराना चाहिए था। इसमें कम से कम दस वर्ष की सजा का प्रावधान है। जबकि ऐसा नहीं हुआ। इस मामले को 498 ए के तहत दर्ज किया गया है जो पर्याप्त नहीं है।