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रकीबुल को भूल तार ने लिया शूटिंग में पार्ट, सिल्वर जीत ऊंचा किया नाम

7 वर्ष पहले
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रांची. तारा शाहदेव छह अंकों से 35वें नेशनल गेम्स के लिए क्वालीफाई करने से चूक गईं। पांचवीं झारखंड स्टेट शूटिंग चैंपियनशिप में शनिवार को तारा 10 मीटर एयर राइफल में 400 में से 370 अंक हासिल कर दूसरे स्थान पर रहीं। झारखंड स्टेट राइफल एसोसिएशन के जनरल सेक्रेट्री उत्तम चांद ने कहा कि तारा ने अच्छा कमबैक किया। इस स्कोर के आधार पर वह दिल्ली में नवंबर में होने वाले नेशनल शूटिंग चैंपियनशिप में हिस्सा लेगी। वहां अगर तारा 376 अंक हासिल कर लेती है तो वह 35वें नेशनल गेम्स के लिए क्वालीफाई कर जाएगी।
निशांत और अंजली ने किया क्वािलफाई
रांची के निशांत सिंह ने ईस्ट जोन शूटिंग चैंपियनशिप के 10 मीटर राइफल शूटिंग में 389 अंक हासिल कर झारखंड को गोल्ड मेडल दिलाया और नेशनल गेम्स के लिए क्वालीफाई कर लिया। वहीं जमशेदपुर की अंजली दास ने 10 मीटर एयर राइफल में 377 अंक हासिल कर नेशनल गेम्स के लिए क्वालीफाई किया।
अब मैं अपनी दुनिया में लौट आई हूं : तारा
मैं अब अपनी दुनिया में वापस लौट आई हूं। अब यही मेरी जिंदगी है। यही सपना है। इस सपने को पूरा करने के लिए पूरी ताकत लगा दूंगी। यह कहना है नेशनल शूटर तारा शाहदेव का। 24 साल की तारा ने एक बार फिर अपनी पुरानी दुनिया को अपना लिया है। उसकी दुनिया है शूटिंग रेंज का इंडोर स्टेडियम। जहां से पिछले दो महीने से वह एक तरह से गायब हो गई थी। 40 दिनों तक भूख-प्यास से जूझती रही तारा के हाथ अभी भी कांप रहे हैं। इन्हीं हाथों से उसे छह किलो की राइफल उठाकर जीवन की दौड़ में शामिल होना है। होटवार स्थित टिकैत उमराव इनडोर स्टेडियम में ईस्टर्न इंडिया शूटिंग चैंपियनशिप में भाग लेने आईं तारा ने विशेष बातचीत में कहा कि अपनी पुरानी जिंदगी में लौटकर मैं काफी खुश हूं। दो महीने की नरक भरी जिंदगी को अब भूलना चाहती हूं।
पिता व भाई छोड़ कोई खुश नहीं
तारा बताती है कि इस कदम से उसके अपने ही खुश नहीं हैं। मौसेरी व चचेरी बहनों ने तो बात करना ही छोड़ दिया है। सिर्फ पिता और भाई के सहयोग से वह पुरानी दुनिया में लौट पाई है। इस पूरे मामले में महिला कोच मीरा चौधरी का उसे नैतिक समर्थन मिला। दिल्ली के कोच सुधीर तोमर उसका मनोबल ऊंचा बनाए रखने में पूरी मदद कर रहे हैं।
शूटिंग के लिए कोई सुविधा नहीं
तारा बताती है कि शूटिंग के लिए यहां कोई सुविधा नहीं है। एक ही राइफल से तीन लोग अभ्यास करते हैं। कोच नहीं हैं। इसके बाद भी उसका अगला लक्ष्य दिल्ली में नवंबर-दिसंबर में आयोजित नेशनल चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतना है। इसके लिए वह मानसिक रूप से तैयार है। शारीरिक तौर पर थोड़ी कमजोर जरूर है। वह अभी लगातार आधे घंटे तक खड़ा नहीं रह पाती है। पीठ की हड्डी में दर्द है।
आगे की स्लाइड्स में देखिए शूटिंग रेंज की तस्वीरें।