रांची. नेशनल शूटर तारा शाहदेव ने कहा है कि अब वे रंजीत सिंह कोहली उर्फ रकीबुल से डाइवोर्स लेने की तैयारी में हैं। जल्द ही कोर्ट में आवेदन देंगी। वे चाहती हैं कि उनका नाम रंजीत से जल्द से जल्द अलग हो जाए। उसने कहा कि उसकी लाइफ टफ हो गई है। पैसे की तंगी ज्यादा परेशान कर रही है। समय के साथ वह संघर्ष कर रही है। कम उम्र में इतनी बड़ी त्रासदी और जीने का संघर्ष उसे परेशान कर देता है। तारा फिलहाल कानूनी दांव-पेंच में उलझी है। नेशनल गेम्स के लिए क्वालिफाई कर चुकी तारा ने दैनिक भास्कर से बातचीत की। अपनी पीड़ा से अवगत कराया।
तारा कहती है, उस पर घर की बड़ी जिम्मेवारी है। घर में अकेली लड़की है। उसे अपने बीमार पिता की देखरेख करनी पड़ती है। सर से मां का साया दो माह पहले ही उठ चुका है। पिता, भाई व खुद के लिए भोजन तैयार करने के साथ घर का पूरा कामकाज निपटाना मेरे ही जिम्मे है। इसके बाद प्रैक्टिस के लिए शूटिंग रेंज जाना। शूटिंग से लौटते ही कानूनी दांव-पेंच के लिए वकील के साथ तैयारी करना। कहती हैं कि किसी लड़ाई के लिए हम समय का इंतजार नहीं कर सकते हैं। लड़ाई चलती रहेगी, खेल भी चलता रहेगा। भले ही लाइफ टफ हो गई है, पर संघर्ष ही तो जीवन है। इसी में जीना है।
अब मैं अपनी दुनिया में लौट आई हूं : तारा
रांची. मैं अब अपनी दुनिया में वापस लौट आई हूं। अब यही मेरी जिंदगी है। यही सपना है। इस सपने को पूरा करने के लिए पूरी ताकत लगा दूंगी। यह कहना है नेशनल शूटर तारा शाहदेव का। 24 साल की तारा ने एक बार फिर अपनी पुरानी दुनिया को अपना लिया है। उसकी दुनिया है शूटिंग रेंज का इंडोर स्टेडियम। जहां से पिछले दो महीने से वह एक तरह से गायब हो गई थी। 40 दिनों तक भूख-प्यास से जूझती रही तारा के हाथ अभी भी कांप रहे हैं। इन्हीं हाथों से उसे छह किलो की राइफल उठाकर जीवन की दौड़ में शामिल होना है। होटवार स्थित टिकैत उमराव इनडोर स्टेडियम में ईस्टर्न इंडिया शूटिंग चैंपियनशिप में भाग लेने आईं तारा ने विशेष बातचीत में कहा कि अपनी पुरानी जिंदगी में लौटकर मैं काफी खुश हूं। दो महीने की नरक भरी जिंदगी को अब भूलना चाहती हूं।
पिता व भाई छोड़ कोई खुश नहीं
तारा बताती है कि इस कदम से उसके अपने ही खुश नहीं हैं। मौसेरी व चचेरी बहनों ने तो बात करना ही छोड़ दिया है। सिर्फ पिता और भाई के सहयोग से वह पुरानी दुनिया में लौट पाई है। इस पूरे मामले में महिला कोच मीरा चौधरी का उसे नैतिक समर्थन मिला। दिल्ली के कोच सुधीर तोमर उसका मनोबल ऊंचा बनाए रखने में पूरी मदद कर रहे हैं।
शूटिंग के लिए कोई सुविधा नहीं
तारा बताती है कि शूटिंग के लिए यहां कोई सुविधा नहीं है। एक ही राइफल से तीन लोग अभ्यास करते हैं। कोच नहीं हैं। इसके बाद भी उसका अगला लक्ष्य दिल्ली में नवंबर-दिसंबर में आयोजित नेशनल चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतना है। इसके लिए वह मानसिक रूप से तैयार है। शारीरिक तौर पर थोड़ी कमजोर जरूर है। वह अभी लगातार आधे घंटे तक खड़ा नहीं रह पाती है। पीठ की हड्डी में दर्द है।