रांची. तारा शाहदेव ने परेशानियों को दरकिनार करते हुए नेशनल क्वालिफाइंग शूटर्स प्रैक्टिस का स्वर्ण व रजत पदक जीता। उन्हें सोमवार की शाम खेलगांव में शूटिंग प्रतियोगिता में ये मेडल मिले। मेडल पाते ही उन्हें लगा कि फिर से जिंदगी में नई ऊर्जा लौट आई है। आत्मविश्वास लौट आया है। अब तारा 25 अक्टूबर को नवंबर में होने वाली नेशनल शूटिंग चैंपियनशिप में हिस्सा लेने दिल्ली जाएगी। वहां विभिन्न राज्यों के क्वालिफाइंग में सफल हुए शूटर्स एकल स्पर्धा में हिस्सा लेंगे। तारा को गोल्ड पाने के लिए चार अंक कम थे, पर उसे एनक्यूएस के तहत चार अंक मिल गए और उन्हें सोना प्राप्त हो गया।
इससे पहले तारा ने ईस्ट जोन शूटिंग चैंपियनशिप में रजत पदक जीता था। तारा झारखंड की ओर से 372 अंक प्राप्त कर पहले स्थान पर रही और स्वर्ण पर कब्जा किया। तारा कहती हैं, काफी दिनों के बाद कुछ खुशी मिली है। वरना खुशी क्या होती है, वो तो भूल चुकी थीं। आज मेडल मिलने के बाद लगा कि अब पुरानी दुनिया में लौट चुकी हूं। इस पल की खुशी को मैं बयां नहीं कर सकती।
मेडल मिलने के बाद वह खेलगांव में ज्यादा देर तक नहीं रुकीं। वहां से वह सीधे घर पहुंची और दोनों मेडल पिता के हाथ में रख दिए। मेडल के साथ बेटी को खुश देख कर वो भी भावुक हो गए और तारा को गले से लगाकर रोने लगे। तारा की आंखों में भी आंसू छलक उठे। तारा कहती हैं, शादी के बाद जीवन बदल गया था, पर शूटिंग ने फिर से मेरी पुरानी जिंदगी लौटा दी। वो बताना नहीं भूलतीं कि अपने इंगेजमेट के दिन उसे अंतिम बार गोल्ड मेडल मिला था। इसके बाद आज लगा कि वही पुरानी तारा हूं।
सारी जिम्मेवारी अपने हाथ में लेकर आगे बढ़ रही तारा
तारा शाहदेव नई जीवन की शुरुआत में लगी हैं। वो कहती हैं, नौ घंटे शूटिंग की प्रैक्टिस के साथ ही घर का पूरा काम करती हूं। प्रैक्टिस पर जाने से पहले घर के सारे काम के साथ ही पिता का खाना बनाकर रख देती हूं। इसी बीच वह एक घंटे तक योगा भी कर लेती हैं। तारा का कहना है कि पहले आजादी से घूमती थीं, पर जब से गार्ड मिले हैं वो उन्हें छोड़कर अकेले कहीं नहीं जा पाती है। प्रैक्टिस के दौरान भी गार्ड के मौजूद रहने से असहज महसूस होता है।
एक गोली से साध लिया दो लक्ष्य
तारा कहती हैं, शूटिंग प्रतियोगिता में दूसरे प्रतिभागियों का लक्ष्य सिर्फ मेडल था, पर हमें तो दो-दो लक्ष्य साधने थे। पहला उस अंधेरे से निकला था जो रकीबुल ने दिए हैं और दूसरा मेडल प्राप्त कर आत्मविश्वास वापस करना। भगवान का शुक्र है कि आज दोनों मिल गए। यह मेडल मेरे जीवन के टर्निंग प्वाइंट साबित होंगे। हालांकि, तारा यह भी कहती हैं कि रकीबुल ने जो किया है उसे भूलने में काफी समय लगेगा।
केस को लेकर चिंतित रहती हैं तारा
तारा अपने केस को लेकर चिंतित रहती हैं। इसके लिए वह अक्सर अपने अधिवक्ता से विचार-विमर्श करती हैं। वह कहती हैं, हमारा केस हाई प्रोफाइल है। रकीबुल संपर्क का बादशाह है। उसके पास अफरात पैसे न जाने कहां से आते हैं। पैसे के बल पर वह कुछ भी करा सकता है। वो कहती हैं कि रकीबुल ने जो कष्ट दिया, उससे ज्यादा उसे क्या कोई परेशान करेगा।
जेएन कॉलेज से करेंगी ग्रैजुएशन
इसी साल तारा शाहदेव ने इंटर पास किया था। इसके बाद शादी हो गई और उसकी पढ़ाई छूट गई। हालांकि, पिछले दिनों उन्होंने खेल कोटा से जेएन कॉलेज में ग्रैजुएशन में नामांकन के लिए फॉर्म भरा है। उन्होंने बताया कि ऑटर्स लेकर आगे की पढ़ाई करेंगी।
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