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झारखंड का खजाना हुआ खाली

9 वर्ष पहले
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रांची . राज्य सरकार का खजाना खाली हो गया है। पिछले सात दिनों से झारखंड आर्थिक संकट से गुजर रहा है। सरकार भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से उधार (वेज एंड मिंस एडवांस) लेकर काम चला रही है। खजाने की स्थिति को देखते हुए ट्रेजरी को बड़े बिल की निकासी पर कड़ी नजर रखने की हिदायत है। आने वाले दिनों में वित्तीय स्थिति और खराब होने की संभावना है।

सरकारी खजाने पर 13 फरवरी की शाम ही लाल बत्ती जल गई। 14 फरवरी को आरबीआई से 180 करोड़ वेज एंड मिंस एडवांस लेकर सरकारी बिल का भुगतान करना पड़ा। इसके बाद सरकार सतर्क हुई, तो एडवांस घटकर 60 करोड़ पहुंच गया।

फिर सरकार ने आरबीआई से 1000 करोड़ का बाजार ऋण के लिए पहल की। मंगलवार को 8.6 फीसदी सूद पर खजाने में 1000 करोड़ रुपए आ गए हैं। इस पैसे पर 4.25 फीसदी सूद देय है। 280 करोड़ की सीमा पार होते ही राज्य सरकार पर आरबीआई का ओवर ड्राफ्ट हो जाएगा। ओवर ड्राफ्ट पर राज्य सरकार को 6.5 फीसदी ब्याज का अतिरिक्त भुगतान करना होगा।

16300 करोड़ की राज्य योजना में 31 जनवरी तक करीब 6100 करोड़ ही खर्च होने की सूचना है। दो माह में 10200 करोड़ खर्च करने की चुनौती है।आरबीआई से बाजार ऋण से 1000 करोड़ जुटा रही है सरकार, 8.6 फीसदी चुकाना होगा सूद

आगे की तैयारी
बाजार ऋण से 1000 करोड़ रुपए जुटाने के बाद भी काम चलना संभव नहीं है। ऐसे में सरकार को मार्च के पहले सप्ताह में फिर 500 करोड़ का बाजार ऋण लेना पड़ेगा।

लिमिट बढ़ाने की मांग

राज्य सरकार निगोसोसिएटेड लोन से पूरी राशि नहीं मिलने को आधार बनाकर बाजार ऋण से अधिकतम सीमा 3200 करोड़ को बढ़ाकर 4000 करोड़ रुपए करने की मांग करेगी।

सुधार की कोशिश

राज्य की वित्तीय स्थिति में सुधार के लिए कोशिश हो रही है। स्थिति पहले से ही ठीक नहीं है। हालांकि यह केवल इसी राज्य का मामला नहीं है। दूसरे राज्यों और केंद्र में भी ऐसी ही स्थिति है। हम बेहतर स्थिति बनाने के लिए काम कर रहे हैं। स्थिति में सुधार हो रहा है। पैसे आने के उपाय किए जा रहे हैं। नियमित प्रयास हो रहा है।
मधुकर गुप्ता, सलाहकार