रांची. रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा (टीआरएल) विषय के शिक्षकों के लिए अच्छी खबर है। इन शिक्षकों की सेवा का कटऑफ डेट निर्धारित कर दिया गया है। इनकी सेवा की गणना वर्ष 1989 से की जाएगी। परिनियम समिति की मुहर लगने के बाद संबंधित प्रस्ताव को राजभवन भेज दिया गया है। अब सिर्फ औपचारिकता शेष रह गई है।
राज्यपाल सह कुलाधिपति डॉ. सैयद अहमद द्वारा प्रस्ताव पर स्वीकृति दिए जाने के साथ ही टीआरएल शिक्षकों को लाभ मिलने का मार्ग प्रशस्त हो जाएगा। आरयू प्रशासन ने प्रस्ताव की एक प्रति मानव संसाधन विकास विभाग को भी भेज दी है। इन शिक्षकों को एक साथ 16 इंक्रीमेंट मिलेगा। टीआरएल शिक्षकों के प्रस्ताव का ड्राफ्ट डिप्टी रजिस्ट्रार डॉ. प्रीतम कुमार ने तैयार किया था।
इसलिए कटऑफ डेट हुआ वर्ष 1989
टीआरएल शिक्षकों को योजना मद से गैरयोजना मद में 15 जुलाई 1989 को रखा गया था, इसलिए इसे ही कटऑफ डेट मान लिया गया। यही वजह है कि कटऑफ डेट से झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) द्वारा कन्फर्म होने के वर्ष तक का इंक्रीमेंट मिलेगा।
जेपीएससी ने 18 अप्रैल 2006 को टीआरएल शिक्षकों की सेवा कन्फर्म की थी, क्योंकि वर्ष 2006 के बाद से इन शिक्षकों को इंक्रीमेंट मिल रहा है। यानी 16 साल का एकमुश्त इंक्रीमेंट इनके वेतन में जोड़ा जाएगा, लेकिन वास्तविक लाभ जेपीएससी द्वारा कन्फर्म की गई तिथि से मिलेगा।
वर्षों से कर रहे संघर्ष
टीआरएल के शिक्षक वर्षों से सेवा की गणना की तिथि तय करने के लिए संघर्ष कर रहे थे। इस विषय के शिक्षक योगदान की तिथि से सेवा गणना की मांग कर रहे थे। इनका समर्थन फुटाज, रुक्टा, रुस्टा, रांची कॉलेज और पीजी शिक्षक संघ समेत अन्य संगठनों ने किया था। इस संबंध में कई बार विभागीय और विवि अधिकारियों से भी वार्ता हुई थी। हालांकि इसके बाद भी इनकी सेवा का कटऑफ डेट वर्ष 1989 ही माना गया।
आगे क्या
राजभवन द्वारा प्रस्ताव को स्वीकृति दिए जाने के बाद टीआरएल शिक्षकों का वेतन निर्धारण 16 इंक्रीमेंट जोड़कर किया जाएगा। इसके बाद प्रस्ताव को एचआरडी में अनुमोदन के लिए भेजा जाएगा। एचआरडी से स्वीकृति मिलते ही एरियर और नए वेतनमान के अनुसार प्रतिमाह वेतन का भुगतान किया जाएगा। एरियर मद में शिक्षकों को लाखों रुपए मिलेंगे। वहीं प्रतिमाह इन शिक्षकों के वेतन में भी काफी वृद्धि हो जाएगी।