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सर्व शिक्षा अभियान के तहत सत्र शुरू, दो माह बाद मिलेंगी किताबें

8 वर्ष पहले
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रांची. सर्व शिक्षा अभियान के तहत राज्य के 50 लाख छात्रों को इस बार समय पर किताबें नहीं मिल सकेंगी। झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद ने किताबों की छपाई की प्रक्रिया शुक्रवार से शुरू कर दी है। छपाई के लिए परिषद की ओर से टेंडर शुक्रवार को जारी कर दिया गया है। इसके लिए 25 फरवरी को टेंडर का टेक्निकल बिड खोला जाएगा। इसके बाद फाइनेंशियल बिड की तिथि की घोषणा की जाएगी, फिर टेंडर फाइनल होगा। इस तरह से किताबों की छपाई का कार्य मार्च से ही शुरू हो सकेगा। छपाई के बाद किताबों को स्कूल तक पहुंचने के लिए 75 दिनों का समय परियोजना द्वारा पब्लिशर्स को दिया गया है। यानी बच्चों को किताबें नए सत्र के शुरू होने के डेढ़ माह बाद ही मिल सकेंगी।

छपाई प्रक्रिया शुरू करने में इसलिए हुई देरी

किताबों की छपाई में हर साल बजट बढ़ता जा रहा है। बढ़ते बजट को लेकर पिछली पैब की बैठक में केंद्र ने टिप्पणी की थी कि किताबों की छपाई पर ज्यादा राशि खर्च की जा रही है। इसके बाद जेईपीसी ने कार्यकारिणी की बैठक में निर्णय लिया कि इस बार किताबें एनसीईआरटी से खरीदी जाएंगी। लेकिन जब एनसीईआरटी से किताब खरीद का बजट लिया गया तो पता चला कि इतनी किताबों पर करीब 218 करोड़ की राशि खर्च होगी। जबकि केंद्र ने किताबों की छपाई के लिए करीब 125 करोड़ रुपए ही स्वीकृत किए हैं। इस पूरी प्रक्रिया में जेईपीसी को दो माह का समय लग गया।

50,33,938 सेट छपेंगी किताबें

राज्य के सरकारी प्राइमरी व मिडिल स्कूलों में कक्षा एक से आठ के लिए किताबों की छपाई होनी है। इस बार परियोजना कुल 5033938 सेट किताबें छपवाएगा। सबसे अधिक किताबों का सेट पलामू जिले के लिए 436518 छपवाई जाएगी। रांची जिले के लिए 320033 सेट किताबें छपवाई जाएंगी। वहीं पश्चिम सिंहभूम के लिए 266703, सिमडेगा 97260, सरायकेला 136718, साहेबगंज 231300, रामगढ़ 93152, पाकुड़ 151224, लोहरदगा 76802, लातेहार 150517, कोडरमा 112327, खूंटी 915, जामताड़ा 139882, हजारीबाग 247944, गुमला 192148, गोड्डा 244400, गिरिडीह 409492, पूर्वी सिंहभूम 219644, दुमका 214392, धनबाद 261985, देवघर 259539, चतरा 221292 और बोकारो के लिए 209943 सेट किताबें छपेंगी।

125 करोड़ रुपए होंगे खर्च

वित्तीय वर्ष 2014-15 के लिए कुल 5033938 सेट किताबें छपवाई जा रही हैं। इसपर विभाग को करीब 125 करोड़ रुपए खर्च करने होंगे। वित्तीय वर्ष 2013-14 में कुल 55 लाख किताबों का सेट छपा था, जिसपर 99.2 करोड़ रुपए खर्च हुए थे। वहीं वित्तीय वर्ष 2012-13 में 45 लाख किताबें छपी थीं जिसपर 75.99 करोड़ और वित्तीय वर्ष 2011-12 में 45 लाख किताबों पर 45.63 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे।

गत वर्ष अगस्त में शुरू हुई थी प्रक्रिया

वित्तीय वर्ष 2013-14 में किताबों की छपाई के लिए प्रक्रिया अगस्त में ही शुरू हो गई थी। पहली बार इस सत्र के छात्रों को एक अप्रैल को किताबें मिली थीं। अगस्त से प्रकिया शुरू हुई थी तब अप्रैल में किताबें मिली थीं। इस बार जनवरी में प्रक्रिया शुरू हुई है तो देखना होगा कबतक किताबें बच्चों को मिलती है।

समय पर मिलेंगी किताबें

विभाग का प्रयास है कि बच्चों को इस बार भी समय पर किताबें मिलें। इसके लिए प्रयास किया जा रहा है। कुछ तकनीकी कारणों से किताबों की छपाई की प्रक्रिया देर से शुरू हुई है।ञ्जञ्ज
गीताश्री उरांव, शिक्षा मंत्री