पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • Was A Unique Act Of Rural Works Department

ग्रामीण कार्य विभाग का सामने आया अनोखा कारनामा

8 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
रांची. राजधानी से सटे पुंदाग गांव में आरईओ (ग्रामीण कार्य विभाग) का अनोखा कारनामा सामने आया है। विभागीय अफसरों ने पुंदाग स्थित साहू चौक से जगन्नाथपुर वाया पुंदाग सरना टोली-भागलपुर रोड का निर्माण रैयती जमीन पर करा दिया है। लेकिन जमीन के मालिक से न तो रोड बनाने का परमिशन लिया गया और न ही उसे मुआवजा दिया गया है।
स्थानीय ग्रामीणों ने जब सड़क निर्माण का विरोध किया, तो ठेकेदार समेत विभागीय अफसरों ने चुप्पी साध ली। तब सरना टोली के ग्रामीणों ने मामले की शिकायत नगड़ी बीडीओ से की, मगर वहां से भी कोई कार्रवाई नहीं की गई। मालूम हो कि 5.95 किलोमीटर लंबी इस सड़क के निर्माण का ठेका लगभग 2.64 करोड़ में दिया गया है।
क्या है मामला
सरना टोली-भागलपुर रोड का निर्माण मौजा पुंदाग के खाता नंबर 97 के प्लॉट 2766, खाता नंबर 224 के प्लॉट 2767, खाता नंबर 200 के प्लॉट 2665 सहित अन्य प्लॉट पर हो रहा है। नक्शे में इस जगह पर रोड का जिक्र नहीं है। विभाग ने रोड बनाने से पहले स्थानीय ग्रामीणों से सहमति भी नहीं ली और काम शुरू कर दिया। इसका नतीजा हुआ कि 20 से अधिक लोगों की जमीन पर निर्माण कार्य शुरू हो गया। रोड बनने से लगभग सभी रैयतों की पांच से 20 डिसमिल जमीन चली गई। ग्रामीणों का आरोप है कि भू-माफिया को फायदा पहुंचाने के लिए रोड बनाया जा रहा है। क्योंकि रोड बनने के साथ ही इस क्षेत्र में जमीन की प्लाटिंग शुरू हो गई है और जमीन के भाव बढ़ने लगे हैं।
नियम का भी पालन नहीं
जानकारों के अनुसार सार्वजनिक प्रयोजन के लिए जमीन लेने से पहले आम सभा कराई जाती है। इसमें लोगों की सहमति मिलने के बाद जरूरत के मुताबिक जमीन अधिग्रहित की जाती है। रैयतों को जमीन का मुआवजा देने के बाद ही काम शुरू किया जाता है। ऐसा नहीं होने से रैयत कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं।
ऐसा कोई मामला नहीं
रैयती जमीन पर सड़क निर्माण का मामला सामने नहीं आया है। जब भी किसी निजी जमीन से सड़क गुजरती है, तो रैयत की जमीन अधिग्रहण कर उसे मुआवजा दिया जाता है। बिना मुआवजा दिए रैयती जमीन पर सड़क बन रही है, तो इसकी जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।’ अखिलेश कुमार, कार्यपालक अभियंता, आरडब्ल्यूडी
डीसी से शिकायत का भी असर नहीं
रोड बनाने के लिए हमलोगों से बातचीत नहीं की गई। रोड में हमारी 13 डिसमिल जमीन चली गई। इसके एवज में मुआवजा भी नहीं मिला। बीडीओ और डीसी से शिकायत की, पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।’ मांगी राम कश्यप, रैयत
भू-माफिया अपने फायदे के लिए अफसरों की मिलीभगत से रोड बनवा रहे हैं। ये गांव की जमीन बेचने की साजिश है।’ नंदू मुंडा, रैयत
मेरी 18 डिसमिल जमीन चली गई। एक रुपया नहीं मिला। रोड बनाने से पहले हमसे कोई विचार-विमर्श भी नहीं किया गया। यह अन्याय है।’ कार्तिक महतो, रैयत