(डॉक्टर ने टालते हुए रिम्स रेफर कर दिया। इतना भी नहीं किया गया कि उसे नीचे पहुंचवाते। गार्ड भी चला गया था। दर्द से कराहते उसे दो मंजिल नीचे सीढ़ियाें से खुद उतरकर आना पड़ा।)
रांची. सदर अस्पताल, वह भी राजधानी का। और व्यवस्था व कर्मी ऐसे कि शर्म आ जाए। प्रसव पीड़ा से बेहाल नीलिमा भेंगरा के अस्पताल पहुंचने और फिर बहाने से टालकर उन्हें रिम्स रेफर कर देने तक का नजारा जिसने देखा, यही बाेला- लानत है इतने बड़े अस्पताल पर। यहां मातृत्व के लिए भी संवेदनाएं नहीं बचीं। पति बेलगा होरो और दो बहनों के साथ ऑटो से महिला सदर अस्पताल पहुंची। वह चल भी नहीं पा रही थी। पर अस्पताल का कोई कर्मचारी मदद के लिए नहीं आया। स्ट्रेचर की तो बात ही दूर है।
गार्ड ने हाथ लगाया तो जैसे-तैसे दो मंजिल ऊपर पहुंचाया गया। इमर्जेंसी के बावजूद वहां किसी ने अटेंड नहीं किया। देर तक उसे कुर्सियों पर लिटाए रखा। फिर डॉक्टर ने देखा और 5 मिनट में ही टाल दिया कि पुराने इलाज का रिकॉर्ड नहीं है और ऑपरेशन करने के लिए खून लगेगा। रिम्स ले जाओ। हद तब हो गई, जब महिला को दो मंजिल खुद सीढ़ियां उतरना पड़ा। न एक भी अस्पतालकर्मी और न किसी और का दिल पसीजा कि मदद करता।
हैपी एंडिंग आखिर रिम्स में जीत गई जिंदगी
महिला को अस्पताल लाया गया और कुछ देर में ही ऑपरेशन से महिला ने स्वस्थ बेटे को जन्म दिया। एक डॉक्टर ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि बच्चा नाल में उलझ गया था। महिला काे अधिक दर्द होना स्वाभाविक है। लेकिन, ऐसा कुछ नहीं था कि सदर में डिलेवरी नहीं कराई जा सकती थी। छोटे से ऑपरेशन से स्वस्थ बच्चा हुआ है। न खून की जरूरत पड़ी और न पुराने मेडिकल रिकॉर्ड की।
आगे की स्लाइड्स में देकिए फोटो।
PHOTOS : माणिक बोस.