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नक्सली बंद से थमी गुमला की रफ्तार

9 वर्ष पहले
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भास्कर टीम -!- गुमला
नक्सली अरविंद मिंज की गिरफ्तारी के खिलाफ पीएलएफआई द्वारा बुलाए गए बंद का गुमला जिले में व्यापक असर देखा गया। नक्सलियों के डर से 24 घंटे तक गुमला की जिंदगी थमी रही। पीएलएफआई ने सोमवार की रात को सिसई में दो युवकों की हत्या कर लोगों के जेहन में डर पैदा कर दिया। वैसे बंद के दौरान कहीं से अप्रिय घटना की सूचना नहीं है। परंतु दिनभर नक्सली घटना की अफवाह उड़ती रही। नक्सलियों के डर से शहर से गांव तक सन्नाटा पसरा रहा। वाहनों का परिचालन ठप रहा। चाय व पान तक की दुकान भी नहीं खुली। एक अनुमान के मुताबिक जिले में दो करोड़ रुपए का व्यवसाय प्रभावित हुआ। नक्सलियों के भय से बिशुनपुर व घाघरा प्रखंड में 600 बॉक्साइट ट्रकों के पहिए रुके रहे। इससे 15 हजार लोग प्रभावित हुए हैं। ट्रकों के पहिए रुकने से मजदूर, खलासी, चालक व पठारी इलाकों में छोटे-मोटे होटल करने वाले गरीब लोग सीधे नुकसान में रहे। घाघरा व बिशुनपुर प्रखंड में संचालित सभी माइंस पर ताला लटका रहा। बॉक्साइट उत्खनन क्षेत्र में सन्नाटा पसरा हुआ था। गुमला शहर से छूटने वाली लंबी दूरी की बस, सवारी गाड़ी, टेंपो का परिचालन ठप रहा।
डुमरी व जारी में बंद का असर
डुमरी/जारी -!- यहां भी लोग डर से घरों में दुबके रहे। छत्तीसगढ़ रा\\\'य से सटा होने के कारण यहां नक्सलियों का \\\'यादा भय रहता है। बगल रा\\\'य के नक्सली भी यहां घुस आते हैं। इसलिए यहां बंद का असर देखा गया। डुमरी के अलावा जारी प्रखंड में भी बंद का व्यापक असर देखा गया है।
दिनभर भयभीत रहे लोग
रायडीह -!- चैनपुर व रायडीह थाना क्षेत्र में भय से लोग घर से नहीं निकले। खासकर रायडीह के लोग भयभीत दिखे। यह प्रखंड नक्सल प्रभावित है। इस कारण लोग दिनभर किसी घटना को लेकर आशंकित रहे। अफवाहों का बाजार गरम रहा। रायडीह व चैनपुर की पुलिस गश्ती लगाते हुए नजर आई।