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मुख्य सचिव के यहां फंसी हैं सैकड़ों फाइलें

9 वर्ष पहले
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रांची। मुख्यमंत्री पद से अर्जुन मुंडा के इस्तीफा देने के बाद स्वाभाविक रूप से नीतिगत निर्णयों पर रोक लग गई है। विभिन्न विभागों की दो सौ से अधिक फाइलें मुख्य सचिव के यहां जमा हो गई हैं। उनमें कई ऐसे विषय हैं, जो राज्यहित के हैं। इन पर निर्णय लिया जाना अनिवार्य है। खासकर इस वित्तीय वर्ष में विभिन्न योजनाओं से संबंधित फाइलें भी हैं, जिन पर निर्णय नहीं हो पाने के कारण खर्च करना विभागों के लिए मुश्किल है। आठ जनवरी को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के साथ ही उन्होंने अपने प्रधान सचिव को लिस्ट बना कर सभी संचिकाएं लौटा देने का निर्देश दिया। उसके बाद संचिकाएं लौटा दी गईं।

इन पर लिया जाना है निर्णय

धोती-साड़ी वितरण का मामला फंसा : बीपीएल परिवारों के बीच धोती-साड़ी वितरण का मामला फंस गया है। खाद्य आपूर्ति विभाग की इस बहुचर्चित योजना पर फैसला नहीं हो सका था। अब मुख्य सचिव के स्तर पर इस पर निर्णय करना मुश्किल है।

नि:शक्तता आयुक्त : चार जनवरी को ही सीएम द्वारा नि:शक्तता आयुक्त के पद पर दुबारा सतीश चंद्र की नियुक्ति पर मुहर लग जाने के बाद भी अधिसूचना जारी नहीं हुई। विभागीय सचिव ने फाइल मुख्य सचिव के पास भेज दी है। जबकि बाद में सीएम द्वारा लिए गए निर्णय के आलोक में युवा आयोग और अल्पसंख्यक आयोग के गठन की अधिसूचना जारी हो गई।

प्लानिंग बोर्ड : 12वीं पंचवर्षीय योजना के पहले पांच वर्ष के लिए विकास को ध्यान में रख कर प्लान तैयार किया जाना है। इसी दृष्टिकोण से राज्य में प्लांिनंग बोर्ड का गठन जरूरी है। बोर्ड के उपाध्यक्ष पद पर विकास आयुक्त देवाशीष गुप्ता की नियुक्ति का मामला भी फंस गया। संचिका मुख्य सचिव के पास लौट आई।

बोकारो एक्सप्रेस वे : रांची-बोकारो एक्सप्रेस वे निर्माण की दिशा में चल रही प्रक्रिया अचानक ठहर गई। इससे संबंधित संचिकाओं को भी पथ निर्माण विभाग ने मुख्य सचिव को लौटा दिया है। अब नई सरकार के गठन के बाद इस पर आगे कदम उठाया जा सकेगा।