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तीन सनकी दरिंदों की बनी शिकार, अब मांग रही है इच्छा मृत्यु

9 वर्ष पहले
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धनबाद। न्याय चाहिए, हर जख्म और हर आंसू का हिसाब चाहिए। तीन सनकी दरिंदों का शिकार बनी धनबाद की बेटी सोनाली मुखर्जी ने महिला एवं बाल कल्याण मंत्री कृष्णा तीरथ से यही गुहार लगाई। साथ ही न्याय नहीं मिलने की स्थिति में इच्छा मृत्यु की इजाजत मांगी। मंत्री ने सोनाली को न्याय दिलाने का भरोसा दिलाया है। हवस में अंधे पड़ोसियों ने नौ साल पहले सोनाली का चेहरा तेजाब डालकर जला दिया था। उसकी जिंदगी तबाह करने वाले हमलावरों को कोर्ट ने सजा सुनाई, लेकिन हाईकोर्ट में अपील के बाद वे जेल से बाहर हा गए। सोनाली न्याय के लिए स्पीडी ट्रायल चाहती है, लेकिन अपने शहर धनबाद के अफसरों से उसे सिर्फ कोरे आश्वासन मिले। किसी ने उनके जख्मों पर मरहम लगाने की कोशिश नहीं की।उनके रवैए से आहत सोनाली ने तब दिल्ली जाकर गुहार लगाने का फैसला किया। वहां वह दो साल से न्याय के लिए भटक रही है। मामला हाईकोर्ट में लंबित है। 22 अप्रैल 2003 की घटना घटना 22 अप्रैल, 2003 की है। सोनाली परिवार के साथ धैया के भेलाटांड़ स्थित अपने किराए के मकान की छत पर सोई थी।सोनाली के मुताबिक, रात 2 बजे के करीब उसके पड़ोसी ब्रह्मदेव हाजरा, संजय पासवान और तापस मित्रा छत पर चढ़ आए। उन्होंने सोनाली के चेहरे पर तेजाब फेंक दिया, जिससे उसका चेहरा पूरी तरह जल गया। उसका इलाज पहले बोकारो जेनरल हॉस्पिटल में और फिर दिल्ली में कराया गया। मुझे इच्छा मृत्यु दे दी जाए : सोनाली हर दिन किस्तों में मरने से अच्छा है, एक ही बार मर जाऊं। जिन्होंने मेरी जिंदगी बर्बाद की उनका जेल से बाहर रहना मेरे लिए तेजाब से मिले जख्म से भी अधिक गहरा है। मुझे न्याय नहीं मिल रहा। इसलिए मुझे इच्छा मृत्यु दे दी जाए। क्या हुआ हमलावरों का तापस, ब्रह्मदेव और संजय को निचली अदालत ने दोषी करार देते हुए उन्हें 9-9 साल की सजा सुनाई। वर्ष 2006 में हाईकोर्ट ने तीनों को जमानत दे दी। मजे में हैं तीनो आरोपी : तापस ने धनबाद जेल में रहते हुए वहीं से कमाई का इंतजाम कर लिया था। बाहर निकलने के बाद वह जेल में लिखा-पढ़ी का काम देखता है। संजय पासवान ऑटो चलाकर मजे की जिंदगी जी रहा है। ब्रह्मदेव अपनी पिता का जेसीबी मशीन का कारोबार देख रहा है। क्या है सोनाली की मांग सोनाली स्पीडी ट्रायल से न्याय की मांग कर रही है। वह चाहती है कि उसकी जिंदगी तबाह करने वालों को कड़ी से कड़ी सजा मिले। आर्थिक मदद की जरूरत : इलाज के लिए 17 लाख की जरूरत है। इतनी बड़ी रकम जुटाना उसके परिवार के लिए संभव नहीं है। वह आम लोगों से मदद चाहती है। मैं इस मामले में निर्दोष हूं। जिसने भी उसके साथ ऐसा किया, उसे माफ नहीं किया जा सकता। किसी को किसी की जिंदगी बर्बाद करने का अधिकार नहीं तापस मित्रा, आरोपी बेवजह फंस गया। मेरी बीसीसीएल की नौकरी भी चली गई। मैं तो सोनाली के इलाज को भी तैयार था। मेरा नाम इस घटना से जोड़ा गया, यह मेरे लिए दु:ख की बात है। अदालत से न्याय मिलने का यकीन है। संजय पासवान, आरोपी

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