(महात्मा गांधी)
जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव में इस बार किसके सिर पर होगा ताज और किसको मिलेगा राजनीतिक वनवास। क्या यहां भी चलेगा मोदी का जादू या फिर पीडीपी, नेशनल कांफ्रेंस या कांग्रेस की बनेगी सरकार। आखिर कश्मीर की राजनीति में क्या है खास। dainikbhaskar.com आपको बता रहा है जम्मू-कश्मीर से जुड़ी हर वो बात जो जानना चाहते हैं आप। इसी कड़ी में हम आपको सिलसिलेवार बताएंगे कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के दादा शेख अब्दुल्ला द्वारा लिखी गई पुस्तक 'आतिशे-चिनार' से लिए कुछ अंशों के बारे में...
श्रीनगर। क्या महात्मा गांधी देश के विभाजन के समय कश्मीर रियासत का विलय पाकिस्तान में हो, के पक्षधर थे। एकाएक तो इस बात पर भरोसा नहीं होता। पर, कश्मीर के पहले राज्य प्रमुख शेख अब्दुल्ला ने अपनी पुस्तक आतिशे चिनार में बताया है कि इस राज्य में मुसलमानों की संख्या अधिक होने के कारण महात्मा गांधी इस रियासत का विलय पाकिस्तान में करने के पक्षधर थे।
तत्कालीन नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रमुख शेख अब्दुल्ला ने अपनी पुस्तक में लिखा है कि गांधीजी ने एक बार कहा था, 'चूंकि कश्मीर में मुसलमानों का बहुमत है अतः उसका विलय पाकिस्तान में हो जाना चाहिए। शेख ने किताब में लिखा है 'मैंने चूंकि कश्मीर के एक हिंदू शासक के विरुद्ध विद्रोह करने की हिम्मत दिखाई थी इसलिए हिंदू संप्रदायवादियों की आंखों में हमेशा के लिए चुभने वाला कांटा बनकर रह गया। हिंदुस्तान के बंटवारे के बाद हिंदुओं और मुसलमानों में परस्पर अविश्वास का वातावरण इस प्रकार बना हुआ था कि हर मुसलमान को हिंदुस्तान में शंका की निगाह से देखा जाता था। ऐसी स्थिति में मेरी बिसात क्या थी। मौलाना आजाद जैसी महान हस्ती को भी इस इल्जाम से बरी नहीं रखा गया। इसी कारण मेरे कार्यों को आशंका की निगाह से देखा जाता था।
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