(लालकृष्ण आडवाणी)
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में इस बार भारतीय जनता पार्टी पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की
कश्मीर नीति को आगे रखे कर चुनाव लड़ रही है। प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी से बड़े होर्डिंग अटलजी के यहां इस बार लगे हैं। वहीं पार्टी के बड़े नेता लालकृष्ण आडवाणी और पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. मुरली मनोहर जोशी इस बार कश्मीर के चुनाव प्रचार में कहीं नजर नहीं आ रहे हैं।
भाजपा के मिशन 44 प्लस के तहत बदली राजनीतिक परिस्थतियों ने इस बार राज्य में भाजपा का चेहरा ही यहां पूरी तरह से बदल गया है। केसरिया की जगह हरे और सफेद रंग का उपयोग भाजपा कर रही है। धारा 370 से हाल फिलहाल तो उसने किनारा कर लिया है। ऐसा नहीं है कि पार्टी ने इन दोनों वरिष्ठ नेताओं को भुला दिया है। राज्य चुनाव आयोग को दी गई अपने प्रमुख प्रचारकों की सूची में दोनों नेताओं के नाम हैं। इसके बावजूद भी राज्य के किसी विधानसभा क्षेत्र से इन दोनों नेताओं के नाम की मांग नहीं की गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री राजनाथ सिंह और शाहनवाज हुसैन एवं मुख्तार अब्बास नकवी की सबसे ज्यादा सभाएं हुई हैं। हेमा मालिनी और विनोद खन्ना, नवजोत सिंह सिद्धू की भी सभाएं पहले तीन चरण में हो चुकी हैं। 14 और 20 दिसंबर को होने वाले चौथे और पांचवे चरण के मतदान से पहले भी इन्हीं नेताओं को प्रचार के लिए रिपीट किया जा सकता है। धर्म गुरुओं को भी इस कार्य में लगाया गया है। दूसरे राज्यों के अल्पसंख्यक मोर्चा के कार्यकर्ता भी घाटी में डटे हुए हैं। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव राम माधव लगातार कश्मीर में ही हें।
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