श्रीनगर। कश्मीर में हर चुनाव में नेशनल कांफ्रेंस पर कश्मीरियों को हरा रुमाल और पाकिस्तान का नमक खिलाकर वोट लेने के आरोप खूब लगते रहे हैं। पर इस चुनाव में माजरा कुछ बदला हुआ है। मिशन 44 प्लस की खातिर भाजपा भी सत्ता पाने के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ रही है। पार्टी ने हाल-फिलहाल तो अपनी विचारधारा से ही यू-टर्न ले लिया है। धारा-370, अफस्पा जैसे मुद्दों पर कभी देश भर में हल्ला मचाने वाली पार्टी इस बार इन मुद्दों पर खमोश है।
पूरे देश में भगवा पार्टी के नाम से पहचान बनाने वाली इस पार्टी ने कश्मीर को लेकर पूरे देश में बीते साठ साल में सैंकड़ों बड़े-बड़े आंदोलन किए हैं। कश्मीर की प्रजामंडल पार्टी, जनसंघ और अब भाजपा के कितने ही लोग कश्मीर आंदोलन के चलते अपनी जान गंवा बैठे, वही भाजपा ने यहां अपनी सबसे पुरानी मांग धारा 370 से किनारा कर लिया है। कश्मीर घाटी में भाजपा द्वारा चलाए जा रहे अपने चुनाव अभियान में धारा 370 तो गायब है ही साथ ही इसका केसरिया (भगवा) रंग भी इसके बैनर पोस्टरों में नहीं दिख रहा है।
केसरिया(भगवा) की जगह हरा रंग
पूरे देश में भाजापा अपने प्रचार के लिए केसरिया कलर वाले बेनर, पोस्टर का इस्तेमाल करती है, पर कश्मीर में भाजपा हरे और सफेद कलर का सहारा ले रही है। हरे कलर का कश्मीर घाटी में धार्मिक महत्व है। पीडीपी झंडा हरा है उसका चुनाव निशान कलम दवात है।
मोदी से पहले अटल बिहारी वाजपेयी
भले ही कश्मीर घाटी में चुनाव प्रचार की मुख्य कमान नरेंद्र मोदी के हाथ में हो। पर यहां के लोगों के दिलों में अभी भी अटल बिहारी राज करते हैं। इसका पता इस बात से चलता है कि घाटी में चुनाव प्रचार के लिए जो फ्लैक्स और पोस्टर लगाए गएं हैं उनमें मोदी से बड़ी तस्वीर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की लगी है। इसके साथ ही पोस्टर पर भाजपा की जगह बीजेपी लिखा हुआ है।
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