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(13 दिसंबर 1989) तारीख ने बदली कश्मीर की किस्मत, देश के हर हादसे से जुड़े तार

7 वर्ष पहले
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श्रीनगर। (13 दिसंबर 1989) इस तारीख से पहले कश्मीर के सूरते हाल ऐसे नहीं थे। भारत पाकिस्तान नियंत्रण रेखा पर भी इतनी घटनाएं नहीं होती थी। 13 दिसंबर की तारीख भले ही अब भारत की संसद पर हुए हमले के लिए जानी जाती हो, पर वास्तव में इस तारीख की इबारत आज से 25 साल पहले कश्मीर में देश के तत्कालीन गृहमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी के अपहरण के बाद इसी तारीख को छोड़े गए आतंकियों ने लिख दी थी।
मुफ्ती मोहम्मद सईद की डाक्टर बेटी का अपहरण 8 दिसंबर को आतंकियों ने अस्पताल से घर लौटते वक्त कर लिया था। पांच आतंकियों की रिहाई के बदले उसे 13 दिसंबर को रिहा कर दिया गया था। यही वो समय था जब कश्मीर के हालात बिगड़ने शुरु हुए। 90 के दशक इक्का दुक्का घटनाओं को छोड़ दिया जाए तो कश्मीर के हालत ठीक-ठाक थे। इस अपहरण के बाद भारतीय संसद में भी इस पर बहस हुई थी, उस समय विपक्ष के नेता राजीव गांधी ने संसद में कहा थी कि रूबिया के अपहरण के दौरान उसके लिए नाश्ता और खाना मुफ्ती के घर से भेजा जाता था। इस अपहरण में राज्य के आला पुलिस अधिकारी भी शामिल थे।
अपहरण नहीं एक ड्रामा था
कभी अलगाववादी रहे हिलाल बार कहते हैं कि 13 दिसंबर 1989 से पहले कश्मीर के हालात खराब नहीं थे। कश्मीर में आतंकवाद की शुरूआत रूबिया सईद अपहरण कांड के बाद से हुई। रूबिया का अपहरण एक ड्रामा था जो उसके पिता ने अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए रचा गया। राज्य में आतंकी हिंसा को बढ़ावा कब मिला? आईसी 814 विमान को हाई जैक कर कंधार ले जाकर आतंकी कमांडरों को रिहा कराने की साजिश को किसने प्रोत्साहित किया? जवाब अकसर यही आता है कि अगर 13 दिसंबर, 1989 को सरकार ने आतंकियों के आगे झुकने से इंकार करते हुए रूबिया सईद को रिहा नहीं कराया होता तो शायद कश्मीर में आतंकी हिंसा 1990 के दशक के प्रारंभ में ही समाप्त हो जाती।
मुफ्ती ने कर दिया कार्यवाही के मना
इस घटना के बारे में उस समय जो इस मामले से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों के लेख या वक्तव्य अखबारों में छपते हैं उनसे पता चलता है कि सेना को इस बात का पता चल गया था कि रूबिया सईद को कहां रखा गया है। उसने उस इलाके की घेराबंदी भी कर ली थी। इसके बाद 12 दिसंबर को दिल्ली में तत्कालीन गृहमंत्री रूबिया के पिता मुफ्ती मोहम्मद सईद को इसकी सूचना देकर कार्यवाही की अनुमति मांगी गई पर गृहमंत्री ने यह नहीं दी।
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