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नेशनल कांफ्रेंस का गढ़ हजरतबल, इस बार मिल रही है कड़ी चुनौती

7 वर्ष पहले
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हजरतबल (श्रीनगर)। कश्मीर के सियासी माहौल में बदलाव की बयार में इस बार नेशनल कांफ्रेस को अपने गढ़ों में विरोधियों से कड़ी टक्कर मिल रही है। हालांकि आजादी से लेकर साल 2008 तक नेशनल कांफ्रेस ने हजरतबल सीट पर किसी दूसरे का कब्जा नहीं होने दिया। चुनाव बायकाट का हमेशा नेशनल कांफ्रेस को लाभ मिला है। पिछली बार इस विधानसभा क्षेत्र के आवाम ने लोकतंत्र में विश्वास जताते हुए 29 प्रतिशत के करीब मतदान किया जबकि पहले यहां मात्र 7 प्रतिशत तक मतदान होता रहा है। इस बार भी हजरतबल में मुकाबला दिलचस्प है और नेकां के गढ़ में बीजेपी ने भी उम्मीदवार उतार दिया है।
डल झील के बाहरी इलाके में है क्षेत्र
साल 2008 के चुनावों में डॉ फारूक अब्दुल्ला ने लगभग 4200 वोटों से पीडीपी की आसिया को हरा कर हजरतबल से जीत हासिल की थी। बाद में उन्होंने यह सीट छोड़ दी और उपचुनाव में नेकां की विजयी हुई। लगभग 1 लाख के करीब मतदाताओं वाली हजरतबल सीट डल झील और श्रीनगर शहर से बाहरी इलाके में पड़ती है। पवित्र हजरतबल दरगाह इसी इलाके में होने की वजह से इसका नाम हजरतबल विधानसभा ही रखा गया है। डॉ फारूक अब्दुल्ला के बीमार रहने की वजह से नेकां ने मोहम्मद सईद आखून को प्रत्याशी बनाया है और आखून 1996 और 2002 में इस सीट का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। पीडीपी ने आस्यिा, कांग्रेस ने सईद अहमद, बीजेपी ने मसूद उल हसन के अलावा गुलाम अहमद शाला, मिर्जा सज्जाद हुसैन, मुश्ताक अहमद सोफी, अल्ताफ हुसैन डार, जावेद अहमद टोटा, खालिद तुफैल और गुलाम नबी डार उम्मीदवार हैं। इस बार हजरतबल सीट से चार निर्दलीय जबकि छोटे बड़े दलों समेत 12 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। इस सीट पर लगभग 2500 कश्मीरी विस्थापित मतदाता भी हैं।
बुनियादी सुविधाएं भी नहीं
हजरतबल हलका देखने में खुला और विकसित लगता है परन्तु लोगों की बुनियादी मुश्किलें बिजली, पानी समेत रोजमर्रा की मुश्किलों से जूझना पड़ता है। बेरोजगारी, अच्छी शिक्षा, सेहत की सुविधाओं जैसे कई अन्य मुद्दे भी हावी हैं। इस इलाके में बाढ़ का इतना असर नहीं हुआ परन्तु सियासी बदलाव के चलते नेशनल कांफ्रेस के लिए यह सीट जीतना इतना आसान नहीं है। पीडीपी ने इस बार फिर आसिया को टिकट दिया है। दरअसल इस इलाके में शिया समुदाय का भी खासा प्रभाव है। जिसे देखते हुए नेकां ने तुजुर्बेकार मोहम्मद सईद आखून को टिकट दिया। बीजेपी ने पहली बार अपना उम्मीदवार उतारा है। पिछले चुनावों में इस सीट पर नेकां, पीडीपी और कांग्रेस के बीच ही मुकाबला रहा है। इस बार भी इस हलके में मुकाबला तीनों दलों के बीच रहने वाला है। पीडीपी को लोकसभा चुनावों में हजरतबल से लीड मिली थी। आवाम इस बार किसी दूसरे को मौका देना चाहता है। इसलिए पीडीपी की दावेदार कुछ मजबूत है। साल 2008 के चुनावों में 18 में से 10 उम्मीदवार ऐसे थे जिन्हें एक प्रतिशत भी वोट नही मिला था। बताया जा रहा है कि बायकाट के बावजूद इस बार श्रीनगर में मतदान प्रतिशत 40 प्रतिशत को पार कर सकता है।
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