आज से दो दिन बाद 11 दिसंबर को 'इंटरनेशनल माउंटेन डे' है। इस अवसर पर हम आपके लिए लेकर आए हैं सियाचिन में तैनात भारतीय सैनिकों के बारे में खास जानकारियां...
जम्मू. सियाचिन दुनिया की सबसे ऊंची युद्धभूमि है। यहां सैनिक दुश्मन की गोलियों से ज्यादा मौसम के कारण मारे जाते हैं। 76 किलोमीटर लंबे और 5400 मीटर ऊंचे इस ग्लेशियर पर शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत सैनिक ही टिक पाते हैं।
बंदूक छूने से कट सकती हैं उंगलियां
सियाचिन का तापमान गिरकर -60 डिग्री तक पहुंच जाता है। यहां 15 सेकंड से अधिक समय तक लोहे जैसी धातु के संपर्क में आने पर फ्रॉस्टबाइट (शीतदंश) के शिकार हो सकते हैं। अगर कोई सैनिक यहां नंगी उंगलियों से अधिक समय तक बंदूक के ट्रिगर, गन बैरल या किसी अन्य हिस्से को टच करता है तो वह फ्रॉस्टबाइट का शिकार हो सकता है। अत्यधिक ठंड के कारण उसकी उंगलियां जम सकती हैं। ऐसी स्थिति में तुरंत गरमाहट और उपचार न मिलने पर उंगली काटने तक की नौबत आ जाती है।
आगे की स्लाइड्स में पढ़ें, सियाचिन में किन चुनौतियों का सामना करते हैं भारतीय सैनिक...