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शेख अबदुल्ला ब्रिटिश एजेंट, अंग्रेज अमेरिका के लिए हड़पना चाहते थे कश्मीर

7 वर्ष पहले
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श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के दादा शेख अब्दुल्ला और पंडित जवाहर लाल नेहरू की मित्रता जगजाहिर है। पंडित नेहरू शेख अब्दुल्ला की हर बात पर आंख बद कर विश्वास किया करते थे। नेहरूजी की आंखें तब खुलीं, जब डॉ. कैलाशनाथ काटजू भारत के तत्कालीन गृहमंत्री और जीके हांडू ने शेख अब्दुल्ला के ब्रिटिश एजेंट होने संबंधी दस्तावेज और नेहरू का एक पत्र, जिसे दिल्ली पुलिस ने उस समय बरामद किया था, उनके सामने रखा रखा, तो उन्होंने 9 अगस्त 1957 को शेख अब्दुल्ला को अपदस्थ करके राष्ट्रद्रोह के अपराध में जेल में डाल दिया। इन पत्रों का ब्यौरा तो आज तक नहीं मिला पर कश्मीर में अब्दुल्ला की करतूतें आज पूरा देश भुगत रहा है।
ब्रिटिश सरकार की कश्मीर को अपने कब्जे में लेने की थी योजना
दरअसल, कश्मीर समस्या का जो रूप हमारे सामने है उसके पीछे उमर अब्दुल्ला के दादा शेख अब्दुल्ला तो एक कठपुतली मात्र थे। कश्मीर पर असली निगाह तो अंग्रेजों की थी। कश्मीर को हथियाने के लिए अंग्रेजों ने जो तानाबाना बुना उसी का दूसरा रूप हमारे सामने है। माना जाता है कि जम्मू-कश्मीर की समस्या की शुरुआत 1947 के बाद से हुई। हकीकत में में इसकी शुरुआत उसी समय हो गई थी, जब ईस्ट इंडिया कंपनी ने जम्मू के महाराजा गुलाब सिंह के दरबार में एक अंग्रेज रेजीमेंट को दाखिल कराने की चाल चली। कश्मीर के दूसरे राजा रणवीर सिंह की मौत के बाद अंग्रेज फिर से अपनी पुरानी कोशिश में लग गए। 1885 में वह अपने उद्देश्य में सफल हो गए। इसके पीछे अंग्रेजों का उद्देश्य हर हालात में गिलगित इलाके को अपने कब्जे में करना था। इसके पीछे उनकी यह चाल थी की इस इलाके में भविष्य में अमेरिका की सैन्य गतिविधियों के लिए एक सुविधाजनक इलाका मिल सके। माना जाता है कि इसके पीछे अमेरिका के लिए सोवियत संघ को घेरने में इस क्षेत्र से अच्छा कोई दूसरा क्षेत्र नहीं हो सकता था। इसके बाद अंग्रेजों अपनी चालाकी से गिलगित को गिलगित एजेंसी के नाम पर सन 1889 में अपने प्रशासनिक नियंत्रण में ले लिया। परिणाम यह हुआ कि सिंधु नदी के पूर्व और रावी नदी के पश्चिम तट का पहाड़ी इलाका उनके कब्जे में आ गया। 1925 में प्रताप सिंह के उत्तराधिकारी के रूप में जब महाराजा हरि सिंह को अंग्रेजों की इस चालाकी की सच्चाई समझ आई तो उन्होंने अविलंब गिलगित क्षेत्र से अंग्रेज सैनिकों को हटा कर अपनी सेना तैनात कर दी।
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