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हजरतबल हमले के 20 साल: आतंकियों को सीमा पार जाने दिया और बेलगाम हुआ आतंकवाद

7 वर्ष पहले
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18 आतंकी

15 अक्टूबर 1993 को श्रीनगर की हजरतबल दरगाह पर कब्जा कर बैठ गए। 80 लोग बंधक बनाए।
1700 जवान
अगले दिन दरगाह पहुंचे और उसे घेर लिया। सरकार से आतंकियों की बातचीत शुरू हुई।
32 दिन
बाद सभी आतंकियों को सुरक्षित जाने दिया गया। कुछ को तो पाकिस्तान सीमा पार कराई गई।

स्वीडिश फोटोग्राफर गर्ट होलमर्ट्ज सेना की कार्रवाई से हफ्ताभर पहले हजरतबल पहुंचे थे। आतंकियों ने दरगाह के प्रवेश द्वार पर बेखौफ होकर तस्वीरें खिंचवाईं।


हजरतबल पर कब्जा किए आतंकियों को बिना शर्त छोड़ दिया गया। रूबिया सईद के अपहरण के बाद कश्मीर घाटी में दूसरी बड़ी आतंकवादी घटना थी वह। सरकार के रुख से आतंकियों का हौसला इतना बढ़ा कि घाटी में आतंकवाद बेलगाम हो गया। सरकार को यही डर था कि आतंकी कहीं हजरतबल दरगाह नष्ट न कर दें। इस घटना में शामिल तीन अहम किरदार- आतंकी, मुख्य वार्ताकार और पुलिस अधिकारी- ने भास्कर से बातचीत में किए कई खुलासे-

पढ़ें आगे की स्लाइड्ड में- हजरतबल पर आतंकी हमले के तीन अहम किरदारों से बात की उपमिता वाजपेयी ने

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