कारगिल युद्ध के दौरान अपने साहस और बहादुरी से दुश्मनों के छक्के छुड़ाने वाले भारतीय सेना के एक जवान को जीते-जी शहीद घोषित कर दिया गया था। इतना ही नहीं सरकार ने उसे सेना के सर्वोच्च सम्मान परमवीर चक्र से सम्मानित करने की घोषणा भी कर दी थी। हालांकि उन्नीस वर्षीय वह शख्स अस्पताल में मौत से जंग लड़ रहा था और इस जंग में मौत को हार का सामना करना पड़ा था।
कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय सेना के एक जवान के हैरतअंगेज कारनामों के देखकर हर शख्स की आंखें नम हो गई थीं। इस बहादुर जवान की उम्र केवल 19 साल थी, लेकिन इसने पाकिस्तानी घुसपैठियों के छक्के छुड़ा दिए थे। दुश्मनों ने उसे तीन गोलियां मारी थीं। दो गोलियां उसके कंधों में लगी थीं, जबकि एक गोली उसके कमर में लगी थी। इसके बावजूद उसने न केवल दुश्मनों के बंकरों को नष्ट किया, बल्कि पाकिस्तान के चार सशस्त्र सैनिकों को मार गिराया।
यह हैरतअंगेज कारनामा समुद्र तल से 5,300 मीटर की ऊंचाई पर स्थित चोटी 'टाइगर हिल्स' को दुश्मनों के कब्जे से मुक्त कराने के दौरान हुआ था।18वीं ग्रेनेडियर के नायब सूबेदार योगेंद्र सिंह यादव ने इसे अंजाम दिया था, जो उस समय वह भारतीय सेना के घातक कमांडो का हिस्सा थे।
पाकिस्तानी घुसपैठियों ने टाइगर हिल पर कब्जा कर लिया था। योगेंद्र सिंह और उनका दल वहां से 100 फीट नीचे थे। उन्होंने अपने सैन्य दल के साथ 100 फीट की ऊंचाई पर मौजूद पाकिस्तानी बंकरों को नष्ट करने की योजना बनाई। पर्वतारोहण में प्रशिक्षित योगेंद्र सिंह यादव अपने साथियों के साथ चट्टानों पर चढ़ने लगे। आधी रास्ता तय करने के बाद दुश्मनों ने रॉकेट से एक ग्रेनेड उनकी ओर दाग दिया। इसकी चपेट में आकर उनके साथ के एक दर्जन से अधिक जवान शहीद हो गए। दुश्मनों ने उनके कंधों में दो गोलियां और उनकी कमर में एक गोली मार दी। घायल और लथपथ योगेंद्र सिंह ने शेष 60 फीट की चढ़ाई पूरी कर चोटी के शीर्ष पर पहुंच गए।
उन्होंने मशीनगन से दुश्मनों के पहले बंकर पर सीधे हमला किया और ग्रेनेड फेंक कर बंकर के अंदर मौजूद सभी घुसपैठियों को मार गिराया। इसके बाद वे दूसरे बंकर की ओर भागे और मशीनगन से लैस चार दुश्मनों को हाथों-हाथों मार गिराना शुरू कर दिया। इस दौरान भारतीय सेना की दूसरी टुकड़ी के जवान वहां पहुंच गए और योगेंद्र को बचा लिया। उन्होंने तीसरे बंकर को नेस्तनाबूद किए बिना वापस जाने से इंकार कर दिया। इसके बाद उन्होंने भारतीय सेना के अन्य जवानों के साथ मिलकर दुश्मनों के तीसरे बंकर को भी नष्ट कर दिया और टाइगर हिल्स को अपने कब्जे में ले लिया।
सरकार ने योगेंद्र सिंह यादव को मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित करने की घोषणा की, लेकिन जल्द ही पता लगा लिया गया कि अस्पताल में उनकी सेहत में सुधार हो रहा है। ऐसा उनके हमनाम एक जवान से हुआ जो 'ऑपरेशन विजय' में शहीद हो गया था। टाइगर हिल्स को दुश्मनों के कब्जे से छुड़ाना भारतीय सेना के लिए सबसे महत्वपूर्ण बन गया था।
गौरतलब है कि भारत और पाकिस्तान के बीच 1999 में कारगिल युद्ध हुआ था। इसकी शुरुआत हुई थी 8 मई, 1999 से जब पाकिस्तानी फौजियों और कश्मीरी आतंकियों को कारगिल की चोटी पर देखा गया था। यह लड़ाई 14 जुलाई तक चली थी। माना जाता है कि पाकिस्तान इस ऑपरेशन की 1998 से तैयारी कर रहा था। 14 जुलाई, 1999 को दोनों देशों ने कारगिल पर अपनी कार्यवाही रोक दी थी। हालांकि, इसकी अधिकारिक घोषणा 26 जुलाई, 1999 को हुई थी।
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