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दुर्गा कथा: मधु-कैटभ वध के लिए विष्णु के नेत्रों से हुआ था महाकाली का जन्म

Dainik Bhaskar

Sep 29, 2014, 01:38 PM IST

जानिए कौन हैं देवी दुर्गा, क्यों हैं देवी दुर्गा व कब से हैं देवी दुर्गा...

durga saptshati: story of madhu kaitabh & mahakali
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उज्जैन। दुर्गा सप्तशती में देवी दुर्गा की महिमा बताई गई है। कौन है देवी दुर्गा? क्यों हैं देवी दुर्गा?कब से हैं देवी दुर्गा? आदि सभी बातों की जानकारी दुर्गा सप्तशती में मिलती है। सप्तशती देवी की साधना का श्रेष्ठ माध्यम है। दुर्गा सप्तशती के अनुसार दुर्गा के तीन खास चरित्र महाकाली, महालक्ष्मी व महासरस्वती हैं जिनकी उत्पत्ति का रहस्य दुर्गा सप्तशती के तेरह अध्यायो में आया है।
जानकारों का मानना है कि सप्तशती में सात सौ श्लोक मनुष्य को हर प्रकार की शक्ति और सामर्थ्य प्रदान करते हैं। सप्तशती के पहले अध्याय में दुर्गा के महामाया योगनिद्रा के स्वरुप का वर्णन है। दूर्गा सप्तशती के प्रथम अध्याय के अनुसार भगवान विष्णु के नेत्रों से महाकाली का जन्म हुआ था। यह महाकाली विष्णु के नेत्रों में महामाय योगनिंद्रा के रूप में स्थित थी। प्रलय के अंतिम समय में जब अंधकार छा गया तब महाकाली का जन्म हुआ, इसलिए इन्हें महाकाली भी कहा गया है। इन्हें विष्णु के नेत्रों से उत्पन्न माना जाता है। सप्तशती के अनुसार योगनिद्रा भगवान विष्णु के नेत्रों में निवास करती हैं।
क्या है दुर्गा का अर्थ - दुःख से तारने वाली वाली देवी दुर्गा हैं। दुर्गा का एक अर्थ दुर्गती से रक्षा करने वाली भी है।
क्यों हैं देवी दुर्गा – दुर्गा शक्ति का प्रतीक हैं। मन, वचन और कर्म तीनों तरह से इंसान को शक्ति प्रदान करती हैं। संसार में जब बुरी शक्तियां फैलने लगती हैं तो उनके संहार के लिए दुर्गा यानी साक्षात शक्ति का अवतार होता है।
कब से हैं देवी दुर्गा - दुर्गा को एक तेज पुंज माना गया है, जिसका जन्म गर्भ से नहीं हुआ। दुर्गा अपने किसी भी रूप में गर्भ से नहीं जन्मी हैं, बल्कि वो तो हमेशा से ही हैं। ये सारा संसार उन्हीं देवी दुर्गा का रूप है। दुर्गा के कई रुप हैं। उनके इन्हीं अलग-अलग रुपों की महिमा का वर्णन दुर्गा सप्तशती के तेरह अध्यायो में आया है।
आगे पढ़िए महामाया योगनिद्रा यानी महाकाली की उत्पत्ति का रहस्य...
तस्वीरों का इस्तेमाल प्रस्तुतिकरण के लिय किया गया है।

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