• How to Control Your Kids Smartphone Addiction, addiction of mobile
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Synptoms & Remedies अगर बच्चों को हो जाए मोबाइल, गेमिंग और टीवी का एडिक्शन

बहुत ज्यादा देर तक मोबाइल या कंप्यूटर का यूज करने से बच्चों के स्वास्थ्य को नुकसान हो सकता है।

Danik Bhaskar | Nov 24, 2017, 04:41 PM IST

आजकल बच्चों में मोबाइल वीडियो गेम या टीवी की दीवानगी इतनी है कि ये कब एडिक्शन में बदल जाए, पता नहीं चलता। बच्चों की इन चीजों से जुड़ी आदतों पर नजर रखना और समय रहते सुधार करना बहुत जरूरी होता है, वरना एक समय ऐसा आता है जब बच्चा इनके बिना रह नहीं पाता है। यहां जानिए जिनसे मालूम हो सकता है बच्चे को मोबाइल, इंटरनेट या गेम्स का एडिक्शन है...

मोबाइल- बच्चा मोबाइल एडिक्शन में है ये इन बातों से पता चलता है।

- बच्चे को आंखों में दर्द और खुजली की शिकायत है।

- आंखों के आगे धुंधला रहता है।

- बच्चे को गर्दन में दर्द रहने लगा है।

- लगातार सिर दर्द की शिकायत कर रहा है।

- फोन के बिना चिड़चिड़ापन आता है।

ऐसे करें इन परेशानियों को दूर

- फोन की अनाश्यक चीजों को हटा दें।

- फोन के वो एप्स जो बच्चा यूज करता है, उन्हें लॉक रखें।

- अगर फोन देना आवश्यक ही है तो उसके लिए समय निर्धारित करें।

- फोन में गेमिंग और वीडियो वाले एप्स ना रखें।

- इंटरनेट ब्राउजिंग पर सख्त एतराज करें।

गेमिंग- अगर बच्चे को मोबाइल या कम्प्यूटर गेमिंग का एडिक्शन हो गया है तो उसमें आपको ऐसे सिंटम्स मिलेंगे।

- अगर उसे गेम खेलने को ना मिले तो वो बेचैन रहने लगता है।

- वो अकेले में खेलना पसंद करता है।

- सिर में दर्द और आंखों में जलन की शिकायत करता है।

- बिना गेम खेले वो कुछ सोच नहीं पाता है।

- उसकी उंगलियां अपने आप चलती है या गर्दन झटके खाने लगती है।

- वो कई बार लोगों के बीच भी चुपचाप अपने आप में खोया रहता है।

ऐसे छुड़वाएं गेमिंग की आदत

- गेम खेलने का समय निश्चित करें और टाइमर या अलार्म के साथ इसको फॉलो करें।

- बच्चे को लगातार एक ही गेम ना खेलने दे। जो गेम बच्चा ज्यादा खेलने लगे उसे मोबाइल या कम्प्यूटर से हटा दें।

- बच्चे को आउटडोर गेम्स खेलने के लिए ले जाएं।

- ऐसी एक्टिविटी प्लान करें जिसमें दूसरे लोग शामिल हो सकें।

इंटरनेट और टीवी- बच्चा टीवी या इंटरनेट का दीवाना होता जा रहा है तो आपको उसमें ये बदलाव नजर आएंगे।

- टीवी बंद होने या इंटरनेट ना चलने की स्थिति में बच्चा उदास रहता है, या अकेला फील करता है।

- वो टीवी सीरियल्स के कैरेक्टर्स की लगातार नकल करता है या उसकी आदतें या बोलने का तरीका वैसा हो गया है।

- बच्चा टीवी सीरियल या कार्टून कैरेक्टर्स को अपने जीवन में महसूस करने लगता है।

- अपनेआप से बातें करता है या अकेले में सीरियल्स या कार्टून के डॉयलॉग दोहराता है।

- एक ही सीरियल या कार्टून के लगातार 6 से 8 एपिसोड देखकर भी बोर नहीं होता।

ऐसे करें बच्चे का इलाज

- एक बार में उसे एक ही एपिसोड देखने के लिए परमिट करें।

- बच्चे के टीवी देखने के समय को अलार्म या टाइमर लगाने की आदत डालें ताकि आपको ये पता चल सके कि टीवी बंद करने का समय हो गया है।

- टीवी देखते हुए कभी बच्चों को खाना ना खाने दें।

- बच्चे को सुबह और शाम को आउटडोर गेम्स खेलने के लिए प्रेरित करें ताकि वो टीवी से दूर रह सके और उसका शारीरिक विकास भी हो।