--Advertisement--

पत्नी के इन 4 गुणों से घर में होगी बरकत, आप रहेंगे भाग्यशाली

अंगिरा और याज्ञवल्क्य स्मृति के साथ आपस्तम्ब धर्म सूत्र मे भी पत्नी के गुणों और उसके सम्मान से जुड़ी कई बातें बताई गई हैं

Dainik Bhaskar

Jan 06, 2018, 05:00 PM IST
importance of wife according to hindu ghranth

हिंदू धर्म में पत्नी को पति की अर्धांगिनी भी कहा जाता है, जिसका अर्थ है पत्नी पति के शरीर का आधा अंग होती है। महाभारत में भीष्म पितामाह ने कहा है कि पत्नी को हमेशा खुश रखना चाहिए क्योंकि उसी से वंश की वृद्धि होती है। पत्नी गृहलक्ष्मी होती है यानी पत्नी के खुश और सुखी रहने पर घर में बरकत तो होती ही है साथ ही पैसा भी आता रहता है। कुछ खास गुणों के कारण पत्नी को घर की लक्ष्मी कहा जाता है। महाभारत के अलावा अंगिरा और याज्ञवल्क्य स्मृति के साथ आपस्तम्ब धर्म सूत्रों मे भी पत्नी के गुणों और उसके सम्मान से जुड़ी कई बातें बताई गई है। इस तरह अनेक हिन्दू ग्रंथों में पत्नी के गुण और अवगुणों के बारे में बहुत कुछ बताया गया है।
गरुड़ पुराण के एक श्लोक में भी पत्नी के कुछ गुणों के बारे में बताया गया है। इसके अनुसार जिस व्यक्ति की पत्नी में ये 4 गुण हों, उसे खुद को देवराज इंद्र यानी समृद्ध और भाग्यशाली समझना चाहिए। इन गुणों के प्रभाव से उस घर में पैसों की कमी नहीं होगी और सुख रहेगा। ये गुण इस प्रकार हैं-

सा भार्या या गृहे दक्षा सा भार्या या प्रियंवदा।
सा भार्या या पतिप्राणा सा भार्या या पतिव्रता।। (108/18)

अर्थात- जो पत्नी गृहकार्य में दक्ष है, जो प्रियवादिनी है, जिसके पति ही प्राण हैं और जो पतिपरायणा है, वास्तव में वही पत्नी है।
पत्नी के इन गुणों के बारे में जानने के लिए आगे की स्लाइड्स पर क्लिक करें-

तस्वीरों का इस्तेमाल प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है।

importance of wife according to hindu ghranth

गृह कार्य में दक्ष यानी घर संभालने वाली

गृह कार्य यानी घर के काम, जो पत्नी घर के सभी कार्य जैसे- भोजन बनाना, साफ-सफाई करना, घर को सजाना, कपड़े-बर्तन आदि साफ करना, बच्चों की जिम्मेदारी ठीक से निभाना, घर आए अतिथियों का मान-सम्मान करना, कम संसाधनों में ही गृहस्थी चलाना आदि कार्यों में निपुण होती है, उसे ही गृह कार्य में दक्ष माना जाता है। ये गुण जिस पत्नी में होते हैं, वह अपने पति की प्रिय होती है।
 
importance of wife according to hindu ghranth

प्रियवादिनी यानी मीठा बोलने वाली

पत्नी को अपने पति से सदैव संयमित भाषा में ही बात करना चाहिए। संयमित भाषा यानी धीरे-धीरे व प्रेमपूर्वक। पत्नी द्वारा इस प्रकार से बात करने पर पति भी उसकी बात को ध्यान से सुनता है व उसके इच्छाएं पूरी करने की कोशिश करता है। पति के अलावा पत्नी को घर के अन्य सदस्यों जैसे- सास-ससुर, देवर-देवरानी, जेठ-जेठानी, ननद आदि से भी प्रेमपूर्वक ही बात करनी चाहिए। बोलने के सही तरीके से ही पत्नी अपने पति व परिवार के अन्य सदस्यों के मन में अपने प्रति स्नेह पैदा कर सकती है।
 
importance of wife according to hindu ghranth

पतिपरायणा यानी पति की हर बात मानने वाली

जो पत्नी अपने पति को ही सर्वस्व मानती है तथा सदैव उसी के आदेश का पालन करती है, उसे ही धर्म ग्रंथों में पतिव्रता कहा गया है। पतिव्रता पत्नी सदैव अपने पति की सेवा में लगी रहती है, भूल कर भी कभी पति का दिल दुखाने वाली बात नहीं कहती। यदि पति को कोई दुख की बात बतानी हो तो भी वह पूर्ण संयमित होकर कहती है। हर प्रकार के पति को प्रसन्न रखने का प्रयास करती है। पति के अलावा वह कभी भी किसी अन्य पुरुष के बारे में नहीं सोचती। धर्म ग्रंथों में ऐसी ही पत्नी को पतिपरायणा कहा गया है।
 
importance of wife according to hindu ghranth

धर्म का पालन करने वाली

एक पत्नी का सबसे पहले यही धर्म होता है कि वह अपने पति व परिवार के हित में सोचे व ऐसा कोई काम न करे जिससे पति या परिवार का अहित हो। गरुड़ पुराण के अनुसार, जो पत्नी प्रतिदिन स्नान कर पति के लिए सजती-संवरती है, कम बोलती है तथा सभी मंगल चिह्नों से युक्त है। जो निरंतर अपने धर्म का पालन करती है तथा अपने पति का प्रिय करती है, उसे ही सच्चे अर्थों में पत्नी मानना चाहिए। जिसकी पत्नी में यह सभी गुण हों, उसे स्वयं को देवराज इंद्र ही समझना चाहिए।
 
X
importance of wife according to hindu ghranth
importance of wife according to hindu ghranth
importance of wife according to hindu ghranth
importance of wife according to hindu ghranth
importance of wife according to hindu ghranth
Bhaskar Whatsapp

Recommended

Click to listen..