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अगले जन्म में आप इंसान बनेंगे या नहीं, इस तरह कर सकते हैं मालूम

किन लोगों को मिलता है पुनर्जन्म, लिखा है इन ग्रंथों में

Dainik Bhaskar

Feb 26, 2018, 05:00 PM IST
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कई धर्म ग्रंथों में पुनर्जन्म से जुड़ी मान्यताएं और कहानियां हैं, जिनके आधार पर पुनर्जन्म से जुड़े कई रहस्यों को समझा जा सकता है। कैसे कर्म करने पर कौन सा जन्म हो सकता है इसका पूरा वर्णन धर्म ग्रंथों में दिया गया है। आज हम आपको बताएंगे अलग-अलग ग्रंथों और पुराणों में लिखी पुनर्जन्म से जुड़ी खास बातें..


1. कठोपनिषद् के अनुसार-


योनिमन्ये प्रपघन्ते शरीरत्वाय देहिन: ।

स्थाणुमन्येनुसंयन्ति यथाकर्म यथाश्रुतम् ।।

अर्थ-

संसार के सभी जीवों को उनके ज्ञान और कर्म के आधार पर ही अलग-अलग योनियों में जन्म मिलता है। इसी आधार पर कुछ को पुनर्जन्म तो कुछ को मोक्ष की प्राप्ति होती है।


2. महाभारत के वनपर्व के अनुसार-


शुभै: प्रयोगैर्देवत्वं व्यामिश्रैर्मानुषो भवेत् ।

अर्थ-

मनुष्य यदि शुभ कर्म करें तो उसे देवताओं की योनि प्राप्त होती है और उसके कर्म पाप-पुण्य का मिला-जुला स्वरूप हो तो उसे अगला जन्म मनुष्य का ही मिलता है।


3. पातंजलि योगसूत्र के अनुसार


क्लेशमूल: कर्माशयो दृष्टादृष्ट जन्मनेदनीय: ।

सतिमूले तदिपाको जात्यामुर्भोगा: ।।

अर्थ-

यदि किसी व्यक्ति के पूर्व जन्म के कर्म अच्छे हैं तो उसे उत्तम योनि, आयु और योग की प्राप्ति होगी। जब मनुष्य शरीर का त्याग कर मृत्यु को प्राप्त होता है तो उसका ज्ञान और कर्म उसकी आत्मा के साथ चले जाते हैं और उसे के आधार पर मनुष्य का पुनर्जन्म होता है।


4. योगवाशिष्ठ के अनुसार-


एहिकं प्रोक्तनं वापि कर्म यदचित्तं स्फुरन् ।

पौरूषोसो परो यत्नो न कदाचन निष्फल: ।।

अर्थ-

किसी भी मनुष्य के पुनर्जन्म और इस जन्म में किए गए कर्मों का फल जरूर मिलता है। किसी भी जन्म में किए गए कर्म निष्फल नहीं जाते।


5. श्रीमद्भाग्वत गीता के अनुसार-


यं यं वापि स्मरन्भावं त्यजत्यन्ते कलेवरम् ।

तं तमेवैति कौन्तेय सदा तद्भाव भावित: ।।

अर्थ-

मनुष्य अपने मृत्यु के समय में उन्हीं बातों को याद करता है, जो हर समय उस के अंदर चलती रहती है। मरते समय वह जिस-जिस भाव का स्मरण करता है, वह पुनः जन्म होने पर उसी भाव को पाता है।

आगे देखें खबर का ग्राफिकल प्रेजेंटेशन...



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