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आपके चाहने वालों को नाराज करती है ये 5 आदतें, छोड़ देंगे तो बना रहेगा प्यार

बार-बार होती है अपने खास लोगों से लड़ाई तो आज ही छोड़ दें ये 5 काम

Dainik Bhaskar

Feb 27, 2018, 06:00 PM IST
leave these 5 habits to avoid disputes with close ones

पद्मपुराण को अठारह महापुराणों में से एक है। जीवन में हमेशा सुख-शांति और खुशियां बनाए रखने के लिए पद्मपुराण में 5 ऐसे काम बताए गए है, जिनसे दूर रहना चाहिए। जिस किसी में भी ये 5 आदते होती है, उसके दोस्त और परिवार वाले उससे बार-बार नाराज हो जाते हैं। जो व्यक्ति इन 5 कामों से दूरी बनाकर रखता है, उसे जीवन के सभी सुख और सभी का प्यारा मिलता है।

श्लोक-

न कुर्याच्छुष्कवैराणि विवादं न च पैशुनम्।
न संवसेत्सूचकेन न कं वै मर्माणि स्पृशेत्।।

1. बिना कारण किसी से दुश्मनी न करें

कई लोगों को बात-बात पर गुस्सा करने और बिना कारण ही दूसरों से लड़ने की आदत होती है। जिसकी वजह से कई बार बिना किसी ठोस कारण के ही दूसरों से दुश्मनी हो जाती है। यह आदत कई दुःखों और परेशानियों का कारण बन सकती है, इसलिए हमेशा ध्यान रखें बिना कारण किसी से भी लड़ाई करना या दुश्मनी करना आपके लिए घातक हो सकता है।

2. विवादों से दूर रहें

कई बार हम अपने किसी दोस्त या रिश्तेदार के विवादों में इस तरह शामिल हो जाते है कि वह विवाद हमारा न होते हुए भी हमारा बन जाता है। ऐसे में खुद का कोई विवाद न होने पर भी आप दूसरों की नजर में उनके दुश्मन बन जाते हैं। इसलिए कभी भी किसी अन्य व्यक्ति के विवाद में शामिल न हों, ऐसी बातों से हमेशा दूर ही रहें।

3. किसी के बारे में दूसरों से बुरा न कहें

दूसरों की बुराई करना, दूसरों को नीचा दिखाना कई लोगों की आदत होती है। आगे चलकर यही आदत बर्बादी का कारण बन जाती है। कई बार दूसरों को नीचा दिखाने के चक्कर में मनुष्य अच्छे-बुरे में फर्क नहीं कर पाता और किसी भी हद तक चला जाता है। जिसकी वजह से खुद के लिए परेशानियां खड़ी कर लेता है। जीवन में सुख-शांति बनाए रखने के लिए इस आदत से दूर रहना चाहिए।

4. दूसरों की निंदा करने वाले के साथ न रहें

व्यक्ति के जीवन पर न की सिर्फ उसकी आदतें बल्कि उससे जुड़े सभी लोगों का व्यवहार और आदतें भी असर डालती हैं। किसी से भी दोस्ती करने से पहले उसकी आदतों और व्यवहार को अच्छी तरह से परख लेने में ही भलाई होती है। हमारी दोस्तों की बुरी आदत भी हमारे लिए परेशानी का कारण बन सकती है। इसलिए कभी भी ऐसे किसी व्यक्ति की संगति न करें, जिसे दूसरों की बुराई या निंदा करने की आदत हो।

5. किसी को दुःख पहुंचाने वाली बात न करें

शब्द तीर की तरह होते है, एक बार मुंह से निकलने के बाद उन्हें वापस नहीं लिया जा सकता। इसलिए हर किसी को अपनी बात बहुत ही सोच-समझ कर बोलनी चाहिए। अच्छी बातों से हम किसी के प्रिय बन सकते हैं और बुरे शब्दों से शत्रु। इस बात का हमेशा ध्यान रखें कि अपकी कही बात से किसी को भी ठेस या दुःख न पहुंचे। यही सुखी जीवन का राज है।
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