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जानिए मकर संक्रांति पर कैसे करें व्रत, पूजा और दान

भविष्यपुराण के अनुसार सूर्य के उत्तरायण या दक्षिणायन के दिन संक्रांति व्रत जरूर करना चाहिए।

Dainik Bhaskar

Jan 13, 2018, 03:49 PM IST
makar sankranti 2018 vrat pooja and daan

आज मकर संक्रांति है। इस दिन सूर्य उत्तरायण होता है। ज्योतिष के अनुसार इसी दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है। ज्यादातर हिंदू त्यौहारों की गणना चंद्रमा पर आधारित पंचांग के द्वारा की जाती है लेकिन मकर संक्रांति पर्व सूर्य पर आधारित पंचांग की गणना से मनाया जाता है। मकर संक्रांति से ही ऋतु में परिवर्तन होने लगता है। शरद ऋतु कम होने लगती है और बसंत का आगमन प्रारम्भ हो जाता है। इसके उपरांत दिन लंबे होने लगते हैं और रातें छोटी हो जाती है।

भविष्यपुराण के अनुसार सूर्य के उत्तरायण या दक्षिणायन के दिन संक्रांति व्रत जरूर करना चाहिए। इसका बहुत ही लाभ होता है। इस व्रत में संक्रांति के पहले दिन एक बार भोजन करना चाहिए। इसके साथ ही इस दिन तेल और तिल मिले पानी से नहाना बहुत शुभ माना जाता है। इसके बाद सूर्य देव की पूजा और स्तुति करनी चाहिए। पुराणों के अनुसार इस दिन तीर्थ या गंगा में स्नान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। ऐसे करने वाले को मोक्ष भी मिलता है। इसके अलावा संक्रांति पर्व पर पितरों का ध्यान करना चाहिए और उनके निमित्त तर्पण जरूर करना चाहिए।

मकर संक्रांति पर पूजा करने के लिए भी एक विशेष मंत्र होता है।

आगे पढ़ें कैसे करें पूजा, व्रत और दान और इनका महत्व -

makar sankranti 2018 vrat pooja and daan

मकर संक्रांति व्रत विधि -

 

सुबह सूर्योदय से पहले उठकर नहाने के पानी में तिल मिलाकर नहाएं। इसके बाद सूर्य देव को तांबे के लोटे में शुद्ध जल चढ़ाएं। इस जल में लाल फूल, लाल चंदन, तिल और थोड़ा-सा गुड़ मिलाएं। 

 

जल चढ़ाते हुए ये मंत्र बोलें - 

 

ऊं घृणि सूर्यआदित्याय नम:   

 

इसके बाद नीचे दिए मंत्रों से सूर्य देव की स्तुति करें और सूर्य देवता को नमस्कार करें - 

 

ऊं सूर्याय नम:

ऊं आदित्याय नम:
ऊं सप्तार्चिषे नम:
ऊं सवित्रे नम: ,  

ऊं मार्तण्डाय नम: , 

ऊं विष्णवे नम:

ऊं भास्कराय नम:

ऊं भानवे नम:

ऊं मरिचये नम:

 

इसके बाद पितरों के निमित्त तर्पण करें। फिर दान दें। दान देने से पहले किसी ब्राह्मण या पंडित को बुला लें और अपनी श्रद्धा अनुसार दान का संकल्प करवा लें। संकल्प होने के बाद पंडित जी को प्रणाम कर दक्षिणा दें। फिर तिल, गुड़, ऊनी कपड़े, सौभाग्य सामग्री यानी श्रंगार का सामान आदी चीजों का दान करें। 

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