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सिर्फ श्रीकृष्ण नहीं महाभारत युद्ध में मौजूद थे ये 5 देवता, जानें कब-कैसे की थी मदद

यूटीलिटी डेस्क

Feb 13, 2018, 05:00 PM IST

सिर्फ कृष्ण नहीं इन देवताओं ने भी लिया था महाभारत युद्ध में भाग

role of lord shiva in mahabahar, role of different hindu god in mahabharat
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महाभारत के महायुद्ध में भगवान श्रीकृष्‍ण ने अर्जुन के सारथी के तौर पर भाग ल‌िया था, यह बात तो सभी जानते हैं। लेक‌िन स‌िर्फ कृष्‍ण ही नहीं कई दूसरे देवताओं ने भी महाभारत में अलग-अलग मौकों पर भाग लेकर महाभारत के महायुद्ध में अपनी भूम‌िका न‌िभाई थी।

आज हम आपको बताएंगे कब-कब क‌िस देवता ने महाभारत युद्ध की कथा में भाग लेकर युद्ध की द‌िशा और दशा बदलने में अपना योगदान दिया था-

1. भगवान सूर्य

भगवान सूर्य के वरदान स्वरूप ही कुंती व‌िवाह से पहले मां बनी और कर्ण को पुत्र रूप में प्राप्त किया। जब महाभारत का युद्ध शुरू होने जा रहा था, तभी सूर्य, कर्ण को इंद्र के द्वारा किए जाने वाले छल के बारे में बताते हैं। भगवान सूर्य, कर्ण को समझाते हैं कि इंद्र उनसे कवच और कुंडल मांगने आएंगे लेक‌िन कर्ण उन्हें ये न दें, ताकी युद्ध में उसके प्राण बचे रहें।

2. भगवान शिव

श्री कृष्‍ण के कहने पर अर्जुन ने भगवान श‌िव की तपस्या की, जिससे प्रसन्न होकर भगवान शिव क‌िरात के वेष में प्रकट हुए और अर्जुन को पाशुपतास्‍त्र भेट क‌िया। इस अस्‍त्र के कारण अर्जुन के ल‌िए स्वर्ग के द्वार खुल गए जहां से अर्जुन सारे द‌िव्यास्‍त्र पाने में कामयाब हुए।

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3. भगवान इंद्र

 

सूर्य के बाद महाभारत युद्ध में सक्र‌िय रहने वाले देवता हैं देवराज इंद्र। इसकी वजह यह थी क‌ि इंद्र के पुत्र अर्जुन। इंद्र ने ही भगवान श्री कृष्‍ण से वचन ल‌िया था क‌ि वह हमेशा अर्जुन की सुरक्षा करेंगे। इंद्र ने अर्जुन को देवताओं के सारे द‌िव्यास्‍त्र द‌िए इतना ही नहीं अपने पुत्र अर्जुन की रक्षा के ल‌िए इन्होंने कर्ण से उसके कवच और कुंडल भी दान में मांगे थे।

 

 

4. भगवान ब्रह्मा

 

महाभारत युद्ध के अंत में ब्रह्माजी ने प्रकट होकर युद्ध की द‌िशा बदली थी। यह घटना तब हुई जब अश्वत्‍थामा और अर्जुन दोनों ने ब्रह्मास्‍त्र का प्रयोग क‌िया। ऐसे में सृष्ट‌ि की रक्षा के ल‌िए भगवान ब्रह्मा ने दोनों से अपने-अपने ब्रह्मास्‍त्र को वापस लेने के ल‌िए कहा। अर्जुन ने अपना ब्रह्मास्‍त्र वापस ले ल‌िया, लेक‌िन अश्वत्‍थामा ऐसा नहीं कर पाए और अर्जुन की पुत्रवधू उत्तरा के गर्भ में पल रहे परीक्ष‌ित को इसका न‌िशाना बनाया।

 

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