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क्रिसमस: क्या आप जानते हैं यीशु और बाइबिल से जुड़ी ये बातें?

25 दिसंबर, सोमवार को क्रिसमस है। प्रभु यीशु यानी ईसा मसीह का जन्मदिन।

Dainik Bhaskar

Dec 22, 2017, 05:00 PM IST
Christmas on 25 December, Monday.

25 दिसंबर, सोमवार को क्रिसमस है। प्रभु यीशु यानी ईसा मसीह का जन्मदिन। इसी मौके पर क्रिश्चियन कम्युनिटी के पवित्र ग्रंथ बाइबिल के बारे में जानिए कुछ खास बातें-
बाइबिल कहती है कि ईश्वर एक है और वह अनादि, अनंत और सर्वशक्तिमान है। कोई भी मूर्ति उस ईश्वर का वास्तविक स्वरूप व्यक्त नहीं कर सकती। ईश्वर मनुष्य को पवित्र बनाने, आराधना करने तथा प्रकृति के नियमों के अनुसार जीवन बिताने का आदेश देता है।
बाइबिल के सेकंड हाफ से पता चलता है कि ईसा मसीह ने ईश्वर के बारे में एक नया विचार दिया कि एक ही ईश्वर में तीन व्यक्ति है। पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा। तीनों ही महान एवं शक्तिमान है। ईसा मसीह ने मरकर मानव जाति के सभी पापों का प्रायश्चित किया था। वे ईश्वर के राज्य (किंगडम ऑफ गॉड) की चर्चा करते थे। इसका अर्थ यह था कि पृथ्वी पर ईश्वर की सत्ता ही सबसे अधिक बलवान है। उनका कहना था कि पृथ्वी पर ईश्वर के राज्य की स्थापना शीघ्र ही होने वाली है। वे ईश्वर को पिता और स्वयं को ईश्वर का पुत्र कहते थे।

 

 

ईसाई धर्म का सारांश जानने के लिए आगे की स्लाइड्स पर क्लिक करें-

 

तस्वीरों का इस्तेमाल प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है।
 

Christmas on 25 December, Monday.

ईसाई धर्म का सारांश
ईसाई धर्म में प्रचलित मान्यताओं एवं सिद्धांतों को सार रूप में निम्न बिंदुओं के अंतर्गत दर्शाया जा सकता है।

1. ईश्वर: एक सत्ता है पर उसके तीन रूप है- पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा।
2. पतन: ईश्वर ने मानव को पूर्ण बनाया, किंतु आदम ने ईश्वर का आदेश न मानने का अपराध किया। इस कारण मानव जाति ईश्वर से दूर हो गई और उसका पतन हुआ। (पुरानी बाइबिल)
3. अवतार: मनुष्य और ईश्वर के पुनर्मिलन को पुन: स्थापित करने के लिए ईश्वर यीशु के रूप में मनुष्य बनकर धरती पर अवतरित हुआ। (नई बाइबिल)
4. कुंवारी से जन्म: ईश्वर ने ईशु के रूप में चमत्कार पूर्वक कुंवारी मरियम की कोख (गर्भ) से जन्म लिया।
5. यीशु का द्वैत रूप: यीशु एक ही समय में ईश्वर भी था और मनुष्य भी।
6. प्रायश्चित: ईश्वर ने यीशु के रूप में कष्ट सहा, मनुष्य बनकर बलिदान दिया।
7. पुनरुत्थान: ईश्वर ने यीशु की कब्र से उठकर विश्वास वालों को अमरता प्रदान की।
8. चर्च का देवी आधार: ईश्वर ने यीशु रूप में मनुष्य और ईश्वर के साम्राज्य को स्थापित पद्धति के रूप में चर्च (संघ) का निर्माण किया।
9. कृपा: ईश्वर अपने प्रेम द्वारा मनुष्य को पाप से बचाने के लिए सहायता देता है।
10. पुनरागमन: ईश्वर यीशु के रूप में फिर आएगा। भले लोग कब्र से उठ खड़े होंगे। पुण्यात्माओं की मुक्ति होगी। पापी सदा के लिए नरक में जाएंगे।
 

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ये हैं ईसाई धर्म के प्रमुख संप्रदाय

1. ऐवोनिया
2. मार सिथोनी
3. मानी कबीर
4. रोमन कैथोलिक
5. यौनी टेरिपन
6. यूटल केन
7. बालकानियां
8. प्रोट्रेस्टेन


ईसाई धर्म के प्रमुख ग्रंथ बाईबिल (नई व पुरानी) के बारे में जानने के लिए आगे की स्लाइड पर क्लिक करें-
 

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पुरानी बाईबिल
पुरानी बाईबिल में हजरत मूसा के आने व हजरत नूह व उनके पुत्रों द्वारा ईसाई धर्म फैलाने का जिक्र है। यह मानती है कि नूह के पुत्र हेम के वंशज ही अरब यहूदी और मिश्र ईसाइयों का समूह था, जो सभी परंपरा कहलाया। पुरानी बाईबिल में हजरत मूसा का कार्यकलाप व उपदेशों का वर्णन है।


नई बाईबिल
नई बाईबिल हजरत ईसा मसीह प्रभु यीशु पर आधारित है। यह प्रभु ईसा मसीह को कुंवारी मरियम से जन्मे मानती है। कुंवारी मरियम को पवित्र आत्मा से गर्भवती हुआ बताया गया है। इसमें बताया गया है कि आकाशवाणी ने बताया कि कुंवारी लड़की गर्भवती होगी और एक पुत्र को जन्म देगी। उसका नाम इम्मानुल्ला रखा जाएगा। वह बालक बड़ा होकर लोगों को राह दिखाएगा। सब पाप मिल जाएंगे। वह सबको रोशनी देगा। इजराइल रखवाली करेगा। वह प्रभू यीशु होगा, खुदा का बेटा कहलाएगा।
 

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