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गुरु गोविंदसिंह ने की थी खालसा पंथ की स्थापना, बनाए थे पंच प्यारे

25 दिसंबर, सोमवार को सिक्खों के अंतिम गुरु गोविंदसिंहजी की जयंती है। जब औरंगजेब ने गुरु तेगबहादुर का कत्ल करवा दिया।

Dainik Bhaskar

Dec 24, 2017, 05:00 PM IST
guru govindsingh jayanti on 25 December.

25 दिसंबर, सोमवार को सिक्खों के अंतिम गुरु गोविंदसिंहजी की जयंती है। जब औरंगजेब ने गुरु तेगबहादुर का कत्ल करवा दिया, तो उनकी शहादत के बाद उनकी गद्दी पर गुरु गोविंद सिंह को बैठाया गया। उस समय उनकी उम्र मात्र 9 वर्ष थी। गुरु की गरिमा बनाये रखने के लिए उन्होंने अपना ज्ञान बढ़ाया और संस्कृत, फारसी, पंजाबी और अरबी भाषाएं सीखीं। गुरु गोविंद सिंह ने धनुष- बाण, तलवार, भाला आदि चलाने की कला भी सीखी।
उन्होंने सिखों को अपने धर्म, जन्मभूमि और स्वयं अपनी रक्षा करने के लिए संकल्पबद्ध किया और उन्हें मानवता का पाठ पढ़ाया। पंच प्यारे भी गुरु गोविंद सिंह की ही देन है। केशगढ़साहिब में आयोजित सभा में गुरु गोविंद सिंह ने ही पहली बार पंच प्यारों को अमृत छकाया था। इस घटना को देश के इतिहास में बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि उस समय देश में धर्म, जाति जैसी चीजों का बहुत ज्यादा बोलबाला था।
इस सभा में मौजूद सभी लोगों ने न सिर्फ सिख धर्म को अपनाया, बल्कि सभी ने अपने नाम के आगे सिंह भी लगाया। गुरु गोविंद सिंह भी पहले गोविंद राय थे। इस सभा के बाद ही वे गुरु गोविंद सिंह कहलाए। तभी से यह दिन खालसा पंथ की स्थापना के उपलक्ष्य में वैशाखी के तौर पर मनाया जाता है।


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तस्वीरों का इस्तेमाल प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है।

guru govindsingh jayanti on 25 December.

गुरु गोविंदसिंह ने ऐसे बनाए पंचप्यारे
गुरु गोविंदसिंह ने लोगों में बलिदान देने और संघर्ष की भावना बढ़ाने के लिए केशगढ़ साहिब के पास आनंदपुर में एक सभा बुलाई। इस सभा में हजारों लोग इकट्ठा हुए। गुरु गोविंदसिंह ने यहां पर लोगों के मन में साहस पैदा करने के लिए जोश और हिम्मत की बातें कीं। उन्होंने लोगों से कहा कि जो लोग इस कार्य के लिए अपना जीवन बलिदान करने के लिए तैयार हैं, वे ही आगे आएं।
इस सभा में गुरु गोविंदसिंह जी अपने हाथ में एक तलवार लेकर आए थे। उनके बार-बार आह्वान करने पर भीड़ में से एक जवान लड़का बाहर आया। गुरु जी उसे अपने साथ तंबू के अंदर ले गए और खून से सनी तलवार लेकर बाहर आए। उन्होंने लोगों से कहा कि जो बलिदान के लिए तैयार है, वह आगे आए। एक लड़का फिर आगे बढ़ा। गुरु उसे भी अंदर ले गए और खून से सनी तलवार के साथ बाहर आए। उन्होंने ऐसा पांच बार किया। आखिर में वे उन पांचों को लेकर बाहर आए। उन्होंने सफेद पगड़ी और केसरिया रंग के कपड़े पहने हुए थे। यही पांच युवक उस दिन से 'पंच प्यारे' कहलाए।
इन पंच प्यारों को गुरु जी ने अमृत (अमृत यानि पवित्र जल जो सिख धर्म धारण करने के लिए लिया जाता है) चखाया। इसके बाद इसे बाकी सभी लोगों को भी पिलाया गया। इस सभा में मौजूद हर धर्म के अनुयायी ने अमृत चखा और खालसा पंथ का सदस्य बन गया।

 

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guru govindsingh jayanti on 25 December.
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