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बदलते मौसम के साथ हेल्थ रहे ठीक, ये भी है होली मनाने का कारण

प्राकृतिक दृष्टि से देखा जाए तो यह वही समय होता है, जब शिशिर ऋतु की ठंडक का अंत होता है।

Dainik Bhaskar

Feb 24, 2018, 05:00 PM IST
Science behind the holi festival

2 मार्च को होली उत्सव मनाया जाएगा। ये सिर्फ कोई धार्मिक त्योहार ही नहीं है, स्वास्थ्य और मौसम के नजरिए से भी होली का अपना एक विज्ञान है। इसके पीछे हेल्थ से जुड़े कारण भी है। इसी समय शिशिर ऋतु समाप्त होती है व वसंत ऋतु प्रारंभ होती है। प्राकृतिक दृष्टि से देखा जाए तो यह वही समय होता है, जब शिशिर ऋतु की ठंडक का अंत होता है और वसंत ऋतु की सुहानी धूप हमें सुकून पहुंचाती है। हमारे ऋषि मुनियों ने अपने ज्ञान और अनुभव से मौसम परिवर्तन से होने वाले बुरे प्रभावों को जाना और ऐसे उपाय बताए जिसमें शरीर को रोगों से बचाया जा सके।

इस समय होता है बीमारी का खतरा

उज्जैन के आयुर्वेद डॉ. एम.के. शर्मा के अनुसार दो ऋतुओं के संक्रमण काल में मानव शरीर रोग और बीमारियों से ग्रसित हो जाता है। शिशिर ऋतु में ठंड के प्रभाव से शरीर में कफ की अधिकता हो जाती है और वसंत ऋतु में तापमान बढऩे पर कफ के शरीर से बाहर निकलने की क्रिया में कफ दोष पैदा होता है, जिसके कारण सर्दी, खांसी, सांस की बीमारियों के साथ ही गंभीर रोग जैसे खसरा, चेचक आदि होते हैं। इनका बच्चों पर प्रकोप अधिक दिखाई देता है। इसके अलावा वसंत के मौसम का मध्यम तापमान शरीर के साथ मन को भी प्रभावित करता है। यह मन में आलस्य भी पैदा करता है।

Science behind the holi festival

इन कामों से शरीर में रहती स्फूर्ति

 

स्वास्थ्य की दृष्टि से होली उत्सव के अंतर्गत आग जलाना, अग्नि परिक्रमा, नाचना, गाना, खेलना आदि शामिल किए गए। अग्नि का ताप जहां रोगाणुओं को नष्ट करता है, वहीं खेलकूद की अन्य क्रियाएं शरीर में जड़ता नहीं आने देती और कफ दोष दूर हो जाता है। शरीर की ऊर्जा और स्फूर्ति कायम रहती है। शरीर स्वस्थ रहता है। स्वस्थ शरीर होने पर मन के भाव भी बदलते हैं। मन उमंग से भर जाता है और नई कामनाएं पैदा करता है। इसलिए वसंत ऋतु को मोहक, मादक और काम प्रधान ऋतु माना जाता है।

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