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हाथ में रखना चाहिए तुलसी के पत्ते, ये हैं भगवान की परिक्रमा करने के 5 नियम

क्यों और कैसे की जाती है भगवान की परिक्रमा

Dainik Bhaskar

Jan 08, 2018, 05:00 PM IST
parikrama karne ke niyam, parikrama kaise kare

पूजा करते समय देवी-देवताओं की परिक्रमा की जाती है। शास्त्रों में बताया गया है भगवान की परिक्रमा से अक्षय पुण्य मिलता है और पाप नष्ट होते हैं। इस परंपरा के पीछे धार्मिक महत्व के साथ ही वैज्ञानिक महत्व भी है। जिन मंदिरों में पूरे विधि-विधान के साथ देवी-देवताओं की मूर्ति स्थापित की जाती है, वहां मूर्ति के आसपास दिव्य शक्ति हमेशा सक्रिय रहती है।

मूर्ति की परिक्रमा करने से उस शक्ति से हमें भी ऊर्जा मिलती है। इस ऊर्जा से मन शांत होता है। जिस दिशा में घड़ी की सुई घुमती है, उसी दिशा में परिक्रमा करनी चाहिए, क्योंकि दैवीय ऊर्जा का प्रवाह भी इसीप्रकार रहता है।

परिक्रमा करते समय ध्यान रखनी चाहिए ये 5 बातें-

1. जिस भी देवी-देवता की परिक्रमा की जा रही है, परिक्रमा करते समय मन ही मन उनके मंत्रों का जप करना अवश्य करना चाहिए।

2. परिक्रमा करते समय तुलसी या रुद्राक्ष की माला पहनना शुभ होता है। ये संभंव न हो तो हाथ में तुलसी दल रखकर भी परिक्रमा की जा सकती है। ध्यान रखें गणेशजी की परिक्रमा करते समय तुसली न लें।

3. भगवान की परिक्रमा करते समय मन में बुराई, क्रोध, तनाव जैसे भाव नहीं आने देना चाहिए।

4. परिक्रमा चाहे मंदिर में की जाए या घर पर नंगे पैर ही करना चाहिए।

5. परिक्रमा करते समय किसी से बातें नहीं करना चाहिए। शांत मन से भगवान का स्मरण करते हुए परिक्रमा करनी चाहिए।

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