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शिवजी से जुड़े ये 7 सवालों के जवाब में छिपे हैं आपके सुखी जीवन के रहस्य

शिवजी का स्वरूप अन्य सभी देवी-देवताओं से एकदम अलग है। यहां जानिए शिवजी से जुड़े 10 ऐसे सवालों के जवाब जो अधिकतर लोग जान

Dainik Bhaskar

Feb 12, 2018, 05:00 PM IST
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इस वर्ष पंचांग भेद के कारण दो दिन शिवरात्रि मनाई जाएगी। कुछ क्षेत्रों में 13 फरवरी को और कुछ क्षेत्रों में 14 फरवरी को। शिवरात्रि पर शिवजी की विशेष पूजा करने से सभी प्रकार के दुखों का अंत हो सकता है। शिवजी को भोलेनाथ कहा जाता है यानी शिवजी इतने भोले हैं कि भक्तों की छोटी सी पूजा से भी प्रसन्न हो जाते हैं और मनचाहा वरदान देते हैं। शिवजी का स्वरूप अन्य सभी देवी-देवताओं से एकदम अलग है। यहां जानिए शिवजी से जुड़े 8 ऐसे सवालों के जवाब जो अधिकतर लोग जानना चाहते हैं, इनमें जीवन प्रबंधन के सूत्र छिपे हैं...

प्रश्न 1- शिवजी शमशान में क्यों रहते हैं?
उत्तर- शिवजी का निवास शमशान में बताया गया है। वे घर-परिवार के देवता हैं, सांसारिक होते हुए भी शमशान में निवास करने के पीछे एक संकेत छिपा है। शिवजी का ये संकेत बताता है कि ये संसार मोह माया है, सब कुछ नश्वर है, एक दिन सबकुछ नष्ट हो जाएगा, हर प्राणी की मृत्यु होगी और उसका मृत शरीर शमशान पहुंचेगा। शमशान से ही हर जीव की आत्मा शिवजी में विलीन हो जाती है। शमशान वैराग्य का प्रतीक है। हमारे लिए शिवजी का संकेत ये है कि संसार में रहते हुए अपने कर्तव्य पूरे करें, लेकिन मोह-माया से बचें। संसार में रहते हुए भी वैरागी की तरह रहना चाहिए।

प्रश्न 2- शिवजी गले में नाग क्यों धारण करते हैं?
उत्तर- शिवजी रहस्यमयी हैं और उनके वस्त्र-आभूषण भी बहुत ही रहस्यमयी हैं। इंसान जिनसे दूर भागता है, शिवजी उसे अपने पास रखते हैं। भगवान शिव गले में नाग धारण करते हैं। आमतौर पर इंसान नाग से डरता है और कभी-कभी अकारण ही उसे मार भी देता है। सांप बिना वजह किसी को नुकसान नहीं पहुंचाता है। भगवान शिव नाग को गले में धारण करके यही संदेश देते हैं कि इस सृष्टि का हर जीव उन्हें प्रिय है। किसी भी प्राणी का हत्या न करें, वरना पाप बढ़ेगा।
प्रश्न 3- भगवान शिव के हाथ में त्रिशूल क्यों?
उत्तर- भगवान शिव हमेशा त्रिशूल अपने साथ रखते हैं। वैसे तो त्रिशूल अस्त्र-शस्त्र में गिना जाता है, लेकिन शिवजी के पास इसका होना एक संकेत देता है। त्रिशूल के तीन नुकीले सिरे तीनों कालों भूत, भविष्य और वर्तमान का प्रतीक है। तीनों काल शिवजी के अधीन हैं। त्रिशूल को तीन गुणों का भी प्रतीक माना जाता है। ये तीन गुण हैं सत्, रज और तम। सत् यानी सात्विक, रज यानी सांसारिक और तम यानी तामसिक। त्रिशूल से ही शिवजी अधर्म का नाश भी करते हैं।

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प्रश्न 4- भगवान शिव का वाहन बैल क्या संदेश देता है?
उत्तर- शिवजी का वाहन है नंदी यानी बैल। बैल बहुत ही मेहनती और शक्तिशाली होता है, लेकिन वह शांत रहता है। बैल  कभी थकता नहीं है, हमेशा अपना काम करते रहता है। नंदी हमें यही संदेश देता है कि हमें भी अपना काम करते रहना चाहिए और शक्ति का प्रदर्शन नहीं करना चाहिए।

प्रश्न 5- शिवजी को नीलकंठ क्यों कहते हैं?
उत्तर- प्राचीन समय में देवताओं और दानवों ने समुद्र मंथन किया था, जिसमें कालकूट नामक विष निकला था। ये विष इतना भयानक था कि अगर ये सृष्टि में फैल जाता तो समस्त प्राणी नष्ट हो जाते। पूरी सृष्टि की रक्षा के लिए इस विष का सेवन शिवजी ने किया था। शिवजी ने इस विष को गले में धारण कर लिया था, जिससे उनका कंठ नीला हो गया। इसी कारण शिवजी को नीलकंठ कहा जाता है। नीलकंठ स्वरूप यह संदेश देता है कि विष रूपी बुराइयों अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया। अगर बुराइयां हम पर हावी हो जाएंगी तो हम नष्ट हो जाएंगे।

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प्रश्न 6- शिवजी अपने शरीर पर भस्म क्यों रमाते हैं?
उत्तर- शास्त्रों में शिवजी का स्वरूप ऐसा बताया गया है, जिसमें वे अपने शरीर पर भस्म रमाते हैं। सृष्टि के संहार के बाद राख ही बचेगी, भस्म यानी राख ही इस संसार का सार है, जिसे शिवजी धारण करते हैं। भस्म की ये विशेषता होती है कि इसे शरीर पर लगाने से शरीर के रोम छिद्र बंद हो जाते हैं, जिससे बाहरी वातावरण का बुरा असर शरीर पर नहीं होता है। हर परिस्थिति में भस्म की वजह से शरीर ढल जाता है। शरीर पर भस्म लगाने का संदेश यही है कि हमें भी हर परिस्थिति में ढल जाना चाहिए।

प्रश्न 7- भगवान शिव के माथे पर चंद्रमा क्यों है?
उत्तर- चंद्र शीतलता प्रदान करता है और मन को शांत रखता है। शिवजी ने चंद्र को माथे पर धारण करके यही संदेश दिया है कि जीवन में परेशानियां कितनी भी हो, हमें दिमाग को शांत ही रखना चाहिए। शिवजी संहारक हैं, उनका क्रोध सृष्टि पर प्रलय ला सकता है, ऐसे में चंद्र को माथे पर धारण करके शिवजी मन को शांत रखने का ही संदेश देते हैं। ज्योतिष में चंद्र को मन का कारक माना जाता है और शिवजी चंद्र को माथे पर धारण करते हैं। इसका अर्थ यही है कि मन को दिमाग से नियंत्रित करना चाहिए। मन भटकेगा तो लक्ष्य नहीं मिल पाएगा।
प्रश्न 8- क्यों हैं भगवान शिव की तीन आंखें?
उत्तर- शिव एकमात्र ऐसे ऐसे देवता हैं जिनकी तीन आंखें हैं। इसीवजह से इन्हें त्रिनेत्रधारी भी कहा जाता है। शिवजी के इस स्वरूप का जीवन प्रबंधन ये है कि कभी-कभी हमें दोनों आंखों से भी सही-गलत दिखाई नहीं देता है। ऐसे तीसरे नेत्र यानी अपने विवेक से परिस्थितियों को समझना चाहिए। अपने विवेक का इस्तेमाल करके हम परेशानियों से बच सकते हैं।

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