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ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार क्या आप जानते हैं कितने प्रकार के होते हैं रोग?

ग्रंथों में बताई गई बातों का ध्यान रखने पर हम कई बीमारियों से बच सकते हैं।

Dainik Bhaskar

Dec 31, 2017, 05:00 PM IST
tips for happy life according to brahmvaivarta puran in hindi

आज ज्यादातर लोग ऐसे हैं जो स्वास्थ्य का ध्यान नहीं रख पाते हैं और समय से पहले ही बुढ़ापे के रोगों की गिरफ्त में आ जाते हैं। बुढ़ापे के रोग यानी जल्दी बाल सफेद होना, शरीर कमजोर हो जाना, जल्दी थकान हो जाना, चेहरा निस्तेज हो जाना, पाचन तंत्र बिगड़ जाना, आंखें कमजोर हो जाना आदि। सामान्यत: ये सभी रोग बुढ़ापे की अवस्था में होते हैं, लेकिन अब ऐसा नहीं है। जवानी के दिनों में ही काफी युवा इन रोगों से पीड़ित हो रहे हैं। इनसे बचने के लिए स्वास्थ्य संबंधी सावधानी बरतनी चाहिए। यहां जानिए ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार किस कारण कौन सा रोग हो सकता है...

64 प्रकार के होते हैं रोग

वात, पित्त और कफ ये रोगों के तीन प्रकार हैं। इनके अतिरिक्त एक और ज्वर भी बताया गया है, वह है त्रिदोषज। ये रोगों के मुख्य भेद (प्रकार) हैं। इनके प्रभेद इस प्रकार है- कुष्ठ, घेंघा, खांसी, फोड़ा, मूत्र संबंधी रोग, रक्त विकार, कब्ज, गोद, हैजा, अतिसार, ज्वर आदि। इन सभी भेदों और प्रभेदों को मिलाकर कुल 64 प्रकार के रोग बताए गए हैं।

कफ बढ़ाने वाले सामान्य काम

- यदि कोई व्यक्ति भोजन के बाद तुरंत नहा लेता है तो इससे कफ बढ़ता है।

- बिना प्यास के जल पीना।

- बासी भोजन करना।

- शरीर पर तिल के तेल से मालिश करना।

- बहुत अधिक पके हुए केले खाना।

- रात को सोने से पहले दही का सेवन करना।

- वर्षा के जल में भीगना।

- बहुत ज्यादा मूली खाना।

पित्त बढ़ाने वाले काम

यदि कोई व्यक्ति अधिक समय तक भूखा रहता है, समय पर संतुलित भोजन नहीं करता है, दूषित खाना खाता है, तो पित्त का प्रकोप हो सकता है। अत: खान-पान के समय को लेकर सावधानी रखनी चाहिए।

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वात बढ़ाने वाले काम

- भोजन के तुरंत बाद पैदल चलना, दौड़ना, आग तापना आदि। भोजन के तुरंत बाद कुछ देर वज्रासन में बैठना चाहिए। ऐसा करने पर वात रोग नहीं होते हैं।

- लगातार दुखी रहना। सदैव चिंता करना।

- बहुत अधिक रूखा भोजन करना।

- अधिक उपवास करना।

- अत्यधिक डर-डरकर जीवन व्यतीत करना।

इन कामों से वात यानी वायु रोगों की उत्पत्ति होती है। तीन प्रकार के वात रोग बताए गए हैं। पहला है शारीरिक क्लेश से उत्पन्न होने वाला वात रोग। दूसरा है मानसिक संताप से उत्पन्न होने वाला वात रोग। तीसरा है कामजनित वात रोग।

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