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बलदाऊ जयंती आज, संतान प्राप्ति के लिए करें ये व्रत

Dainik Bhaskar

Sep 04, 2015, 01:00 AM IST

भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी को बलदाऊ जयंती का पर्व मनाया जाता है। यह पर्व भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई श्रीबलराम के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है।

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भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी को बलदाऊ जयंती का पर्व मनाया जाता है। यह पर्व भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई श्रीबलराम के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। धर्म शास्त्रों के अनुसार इस दिन भगवान शेषनाग द्वापर युग में भगवान कृष्ण के बड़े भाई बलराम के रूप में अवतरित हुए थे। इस बार यह पर्व 4 सितंबर, शुक्रवार को है। इस पर्व को हलषष्ठी व हरछठ भी कहते हैं।
धर्म शास्त्रों के अनुसार, बलराम जी का प्रधान शस्त्र हल व मूसल है। इसी कारण इन्हें हलधर भी कहा गया है। उन्हीं के नाम पर इस पर्व का नाम हलषष्ठी पड़ा। हल को कृषि प्रधान भारत का प्राण तत्व माना गया है और कृषि से ही मानव जाति का कल्याण है। इसलिए इस दिन बिना हल चले धरती का अन्न व शाक भाजी खाने का विशेष महत्व है। इस दिन गाय का दूध व दही का सेवन वर्जित माना गया है। इस दिन व्रत करने का विधान भी है।
हलषष्ठी व्रत पूजन के अंत में हलषष्ठी व्रत की छ: कथाओं को सुनकर आरती आदि से पूजन की प्रक्रियाओं को पूरा किया जाता है। भगवान शिव पार्वती, श्रीगणेश, कार्तिकेय, नंदी, सिंह और नाव आदि की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। इस प्रकार विधिपूर्वक हलषष्ठी व्रत का पूजन करने से जिनको संतान नहीं है, उनको दीर्घायु और श्रेष्ठ संतान की प्राप्ति होती है। इस व्रत एवं पूजन से संतान की आयु आरोग्य एवं ऐश्वर्य में वृद्धि होती है।

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