अकबर ने लेना चाहा बीरबल की बुद्धिमानी का टेस्ट तो यूं साबित किया बीरबल ने खुद को / अकबर ने लेना चाहा बीरबल की बुद्धिमानी का टेस्ट तो यूं साबित किया बीरबल ने खुद को

जीवनमंत्र डेस्क

May 25, 2017, 01:09 AM IST

कहते हैं बीरबल जितने बुद्धिमान थे उतने ही दयालु भी। इसलिए वे हमेशा जरुरतमंदों की मदद किया करते थे।

Akbar Birbal story Akbar Birbal story
कहते हैं बीरबल जितने बुद्धिमान थे उतने ही दयालु भी। इसलिए वे हमेशा जरुरतमंदों की मदद किया करते थे। बादशाह से मिलने वाले इनाम को भी ज्यादातर गरीबों और दीन-दुःखियों में बांट देते थे, लेकिन इसके बावजूद भी उनके पास धन की कोई कमी न थी। दान देने के साथ-साथ बीरबल इस बात से भी चौकन्ने रहते थे कि कपटी व्यक्ति उन्हें अपनी दीनता दिखाकर ठग न लें।एक दिन जब बीरबल पूजा-पाठ करके मंदिर से आ रहे थे तो वेष बदले हुए सैनिक ने बीरबल के सामने आकर कहा, हुजूर दीवान! मैं और मेरे आठ छोटे बच्चे हैं, जो आठ दिनों से भूखे है।

भगवान का कहना है कि भूखों को खाना खिलाना बहुत पुण्य का काम है, मुझे आशा है कि आप मुझे कुछ दान देकर अवश्य ही पुण्य कमाएंगे।बीरबल ने उस आदमी को सिर से पांव तक देखा और एक क्षण में ही पहचान लिया कि वह ऐसा नहीं है, जैसा वह दिखावा कर रहा है। बीरबल बिना कुछ आगे चल पड़े। वह व्यक्ति भी बीरबल के पीछे-पीछे चलता रहा। बीरबल ने नदी पार करने के लिए जूती उतारकर हाथ में ले ली। उस व्यक्ति ने भी अपने पैर की फटी पुरानी जूती हाथ में लेने का प्रयास किया।
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हां, वो इसलिए कि शास्त्रों में लिखा है कि बच्चे का जन्म होने से पहले ही भगवान उसके भोजन का प्रबंध करते हुए उसकी मां के स्तनों में दूध दे देता है, उसके लिए भोजन की व्यव्स्था भी कर देता है। यह भी कहा जाता है कि भगवान इंसान को भूखा उठाता है पर भूखा सुलाता नहीं है। इन सब बातों के बाद भी तुम अपने आप को आठ दिन से भूखा कह रहे हो।

 

इन सब स्थितियों को देखते हुए यहीं समझना चाहिए कि भगवान तुमसे रूष्ट हैं और वह तुम्हें और तुम्हारे परिवार को भूखा रखना चाहते हैं लेकिन मैं उसका सेवक हूं, अगर मैं तुम्हारा पेट भर दूं तो ईश्वर मुझ पर नाराज होगा ही। मैं ईश्वर के विरोध में नहीं जा सकता, न बाबा ना। मैं तुम्हें भोजन नहीं करा सकता, क्योंकि यह सब कोई पापी ही कर सकता है।बीरबल का यह जवाब सुनकर वह चला गया।उसने इस बात की बादशाह और दरबारियों को सूचना दी। बादशाह अब यह समझ गए कि बीरबल ने उसकी चालाकी पकड़ ली है।

 

 

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अगले दिन बादशाह ने बीरबल से पूछा, बीरबल तुम्हारे धर्म-कर्म की बड़ी चर्चा है पर तुमने कल एक भूखे को निराश ही लौटा दिया, क्यों। बीरबल बोला आलमपनाह मैंने किसी भूखे को नहीं, बल्कि एक ढोंगी को लौटा दिया था और मैं यह बात भी जान गया हूं कि वह ढोंगी आपके कहने पर मुझे बेवकूफ बनाने आया था। अकबर ने कहा, बीरबल तुमनें कैसे जाना कि यह वाकई भूखा न होकर, ढोंगी है।

उसके पैरों और पैरों की चप्पल देखकर। यह सच है कि उसने अच्छा वेष बनाया था, मगर उसके पैरों की चप्पल कीमती थी।बीरबल ने आगे कहा, माना कि चप्पल उसे भीख में मिल सकती थी, पर उसके कोमल, मुलायम पैर तो भीख में नहीं मिले थे, इसलिए कंकड क़ी गड़न सहन न कर सके।इतना कहकर बीरबल ने बताया कि किस तरह उसने उस इंसान की परीक्षा लेकर जान लिया कि उसे नंगे पैर चलने की भी आदत नहीं, वह दरिद्र नहीं, बल्कि किसी अच्छे कुल का खाता कमाता पुरूष है। बादशाह बोले, क्यों न हो, वह मेरा खास सैनिक है।

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